नसीम अंसारी
हरिद्वार। (परिपाटी न्यूज़) पथरी। (धनपुरा) कहते हैं कि हौसले बुलंद हों तो मुश्किलों के पहाड़ भी इंसान का रास्ता नहीं रोक सकते। इसकी जीती जागती मिसाल ग्राम पंचायत धनपुरा निवासी सूरज हैं। दोनों पैरों से दिव्यांग होने के बावजूद सूरज ने परिस्थितियों के आगे घुटने नहीं टेके। उन्होंने किसी के सामने हाथ फैलाने के बजाय मेहनत को अपना सहारा बनाया और जूते पॉलिश कर अपने परिवार और बच्चों का पालन पोषण कर रहे हैं। सूरज धनपुरा अड्डे पर पंजाब नेशनल बैंक के सामने बरगद के पेड़ के नीचे बैठकर लोगों के जूते पॉलिश करते हैं। उनकी रोजी रोटी का यही एकमात्र सहारा है। शारीरिक परेशानियों के बावजूद उनकी मेहनत और आत्मनिर्भर बनने का जज्बा समाज के लिए एक मिसाल है। पीला राशन कार्ड बना परेशानी मुफ्त राशन के लाभ से वंचित सूरज सूरज की जिंदगी में परेशानियां कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। उनका कहना है। कि आर्थिक स्थिति कमजोर होने और दिव्यांग होने के बावजूद उन्हें मुफ्त राशन योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है। उनके पास पीला राशन कार्ड है। जिसके चलते उन्हें सरकारी सस्ते गल्ले की दुकान से भी पैसे देकर राशन खरीदना पड़ता है। सूरज का कहना है। कि कई बार अपनी परेशानी बताने के बावजूद राशन कार्ड में बदलाव नहीं हो पाया। अब सवाल यह है। कि क्या संबंधित विभाग सूरज की आर्थिक स्थिति की वास्तविक जांच कर उन्हें नियमानुसार पात्रता के अनुसार राशन योजना का लाभ दिलाएगा? टूटी व्हीलचेयर के सहारे जिंदगी की जंग लड़ रहे सूरज सूरज की परेशानी सिर्फ राशन तक सीमित नहीं है। जिस पुरानी व्हीलचेयर के सहारे वह रोजाना काम पर पहुंचते हैं। वह भी अब खराब हो चुकी है। हाथों से व्हीलचेयर चलाकर काम तक पहुंचना उनके लिए किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं है। सूरज की इच्छा है कि उन्हें बैटरी से चलने वाली ट्राइसाइकिल मिल जाए ताकि वह बिना किसी बड़ी परेशानी के अपने काम पर पहुंच सकें और मेहनत-मजदूरी करके अपने परिवार का पालन-पोषण जारी रख सकें। वह मुफ्त की मदद नहीं बल्कि आत्मनिर्भर होकर जीने का एक बेहतर साधन चाहते हैं।

मोहम्मद सलीम ने दिया मदद का भरोसा हाल ही में समाजसेवी मोहम्मद सलीम धनपुरा अड्डे पर पहुंचे। इस दौरान उन्होंने सूरज से अपने जूते पॉलिश कराए। बातचीत के दौरान जब उन्हें सूरज की परिस्थितियों और संघर्ष के बारे में जानकारी मिली तो वह भी उनकी मेहनत और हौसले से प्रभावित हुए। मोहम्मद सलीम ने सूरज को भरोसा दिलाया कि वह अपनी ओर से पूरी कोशिश करेंगे कि उन्हें बैटरी से चलने वाली ट्राइसाइकिल उपलब्ध हो सके और राशन कार्ड से जुड़ी समस्या का भी समाधान कराया जा सके। उन्होंने कहा कि सूरज जैसे मेहनती व्यक्ति के हौसले को सलाम है। दोनों पैरों से दिव्यांग होने के बावजूद वह किसी के सामने हाथ फैलाने के बजाय मेहनत करके अपने बच्चों का पेट पाल रहे हैं। ऐसे व्यक्ति को सरकारी योजनाओं का लाभ मिलना चाहिए। वह अपनी ओर से हरसंभव मदद का प्रयास करेंगे। एसडीएम और जिला पूर्तिअधिकारी से लगाई गुहार मोहम्मद सलीम ने एसडीएम हरिद्वार और जिला पूर्ति अधिकारी से मांग की है कि सूरज की आर्थिक स्थिति की जांच कराई जाए और सरकारी नियमों के अनुसार उन्हें उचित राशन कार्ड एवं राशन योजना का लाभ दिलाया जाए। इसके साथ ही जिला प्रशासन और समाज कल्याण विभाग से भी मांग की गई है कि सूरज की परिस्थितियों को देखते हुए उन्हें बैटरी से चलने वाली ट्राइसाइकिल उपलब्ध कराने के लिए आवश्यक कार्रवाई की जाए। आखिर कब जागेगा जिम्मेदार विभाग? यहां सवाल सिर्फ एक राशन कार्ड या ट्राइसाइकिल का नहीं बल्कि एक ऐसे मेहनतकश व्यक्ति के सम्मान और आत्मनिर्भरता का है। जो तमाम मुश्किलों के बावजूद अपने परिवार की जिम्मेदारी उठा रहा है। जब एक दिव्यांग व्यक्ति मेहनत करके अपने बच्चों का भविष्य संवारने की कोशिश कर रहा है, तो क्या जिम्मेदार विभागों का फर्ज नहीं बनता कि वे उसकी परेशानी को गंभीरता से लें? सूरज को केवल सहानुभूति की जरूरत नहीं बल्कि सरकारी योजनाओं का उचित लाभ और ऐसा सहारा चाहिए जिससे वह सम्मान के साथ अपनी मेहनत जारी रख सकें। अब देखना होगा कि प्रशासन उनकी पुकार सुनता है या यह मामला भी फाइलों तक ही सीमित रह जाएगा।
