हरिओम तोमर
सम्भल (परिपाटी न्यूज़) दुर्गा अष्टमी का पावन पर्व अत्यंत धूमधाम, हर्षोल्लास और भव्यता के साथ मनाया गया। कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण मातृशक्ति का पारंपरिक लाल वस्त्रों में नजर आना रहा, जिससे पूरा आयोजन दिव्यता से सराबोर दिखा।
कार्यक्रम की शुरुआत विधि-विधान के साथ मां दुर्गा के पूजन से हुई। इसके पश्चात परंपरा और सुरक्षा का संदेश देते हुए शस्त्र पूजन भी किया गया, जिसमें संगठन की कार्यकर्ताओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। पूरा पंडाल ‘जय माता दी’ के जयकारों और भक्तिमय भजनों से गूंज उठा। पर्व के इस विशेष अवसर पर छोटी-छोटी कन्याओं का विधिवत पूजन किया गया। उपस्थित सभी लोगों ने कन्याओं के चरण पखारकर उनका आशीर्वाद लिया।

सुंदर वस्त्रों में सजी ये नन्हीं कन्याएं साक्षात मां दुर्गा का रूप प्रतीत हो रही थीं, जिन्हें देखकर पूरा वातावरण मंत्रमुग्ध हो गया। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित रहीं मातृ शक्ति संयोजिका दीपा वार्ष्णेय उन्होंने अपने संबोधन में दुर्गा अष्टमी के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति में नारी को शक्ति का स्वरूप माना गया है। आज आवश्यकता है कि माताएं और बहनें अपनी आंतरिक शक्ति को पहचानें और अपनी संस्कृति व समाज की रक्षा के लिए आगे आएं। उन्होंने सभी कार्यकर्ताओं को एकजुट होकर राष्ट्र सेवा में तत्पर रहने का आह्वान किया। अंत में प्रसाद वितरण के साथ कार्यक्रम का भव्य समापन हुआ।
