अभिषेक पाण्डेय
लखीमपुर खीरी (परिपाटी न्यूज़)मितौली तहसील के बढ़रिया गांव में धान की फसल के नुकसान के आकलन को लेकर विवाद गहराता नजर आ रहा है। ग्रामीणों ने क्षेत्रीय लेखपाल और उनके मुंशी पर सर्वे में मनमानी करने तथा पात्र किसानों को सरकारी मुआवजे से वंचित रखने के आरोप लगाए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि ओलावृष्टि के कारण धान की फसल को भारी नुकसान पहुंचा, लेकिन सर्वे में सभी प्रभावित किसानों को उचित तरीके से शामिल नहीं किया गया। गांव के धर्मेंद्र सिंह ने भी सर्वे प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि फसल के नुकसान का आकलन मनमाने ढंग से किया गया है। इससे वास्तविक नुकसान झेलने वाले किसानों को आर्थिक सहायता मिलने में परेशानी हो रही है। जिलाधिकारी से निष्पक्ष जांच की मांग मामले को लेकर 23 अक्टूबर 2026 को दर्जनों ग्रामीणों ने जिलाधिकारी को शिकायती पत्र सौंपा।

ग्रामीणों ने पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराने और अनियमितताएं पाए जाने पर संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की। उनका कहना है कि जांच के माध्यम से यह सुनिश्चित किया जाए कि सरकारी मुआवजे का लाभ केवल कागजों तक सीमित न रहे, बल्कि वास्तव में नुकसान झेलने वाले किसानों तक पहुंचे। लेखपाल ने आरोपों को बताया निराधार वहीं, क्षेत्रीय लेखपाल अशोक कुमार ने ग्रामीणों द्वारा लगाए गए आरोपों को खारिज किया है। उनका कहना है कि सर्वे के दौरान किसी भी किसान के साथ भेदभाव नहीं किया गया। जिन किसानों ने आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध कराए थे, उन्हें नियमानुसार अनुदान दिलाया गया है। फिलहाल, मामले में ग्रामीणों ने प्रशासन से जांच कराकर वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है। अब देखना होगा कि शिकायत के बाद प्रशासन इस प्रकरण में क्या कदम उठाता है और प्रभावित किसानों को राहत मिल पाती है या नहीं।
