हरिओम सिहँ
लखीमपुर खीरी (परिपाटी न्यूज )मोहम्मदी/पसगवां, लखीमपुर खीरी। सरकारी दफ्तरों में आम नागरिकों को किस तरह छोटी-छोटी प्रक्रियाओं के लिए परेशान होना पड़ता है, इसकी एक तस्वीर पसगवां क्षेत्र से सामने आई है। यहां एक हार्ट पेशेंट पिता संजय अपनी बेटी सोनम का जन्म प्रमाण पत्र बनवाने के लिए पिछले करीब दो महीने से ब्लॉक कार्यालय के चक्कर काट रहा है। आरोप है कि तमाम दस्तावेज जमा करने और लगातार कार्यालय पहुंचने के बावजूद उसे प्रमाण पत्र नहीं मिल सका है। अब संबंधित पत्रावली का पता नहीं चलने की बात सामने आने से उसकी परेशानी और बढ़ गई है। संजय के मुताबिक, बेटी सोनम का स्कूल में दाखिला कराने के लिए जन्म प्रमाण पत्र की आवश्यकता पड़ी। इसके लिए उसने शपथ पत्र, गवाहों और अन्य आवश्यक दस्तावेजों के साथ उपजिलाधिकारी कार्यालय, मोहम्मदी में आवेदन संबंधी औपचारिकताएं पूरी कीं। बताया जाता है कि पत्रावली संख्या 67 के तहत 6 जून 2026 को प्रकरण पसगवां खंड विकास अधिकारी कार्यालय भेजा गया था। संजय को उम्मीद थी कि निर्धारित प्रक्रिया पूरी होने के बाद उसकी बेटी का जन्म प्रमाण पत्र बन जाएगा और उसकी पढ़ाई में आ रही बाधा दूर हो जाएगी। लेकिन संजय का आरोप है कि कई सप्ताह बीतने के बाद भी उसे प्रमाण पत्र नहीं मिला। वह जब भी ब्लॉक कार्यालय पहुंचता, उसे अलग-अलग कर्मचारियों और पटलों पर भेज दिया जाता। कभी संबंधित कर्मचारी के उपलब्ध न होने की बात कही जाती तो कभी पत्रावली कार्यालय में मौजूद न होने की जानकारी दी जाती। कार्यालय में फाइल दिखी, फिर बताया गया पता नहीं संजय का कहना है कि एक दिन एडीओ पंचायत कार्यालय में तैनात सफाई कर्मचारी सौरभ राठौर ने उसे उसकी पत्रावली दिखाई थी। इससे उसे लगा कि अब प्रमाण पत्र मिलने का रास्ता साफ हो जाएगा।

हालांकि, उसके अनुसार बाद में पत्रावली उपलब्ध नहीं होने की बात कही जाने लगी। संजय ने कार्यालय में लिपिकों की कथित अनुपस्थिति और सफाई कर्मचारियों के कार्यालयी कामकाज में शामिल होने को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उसका आरोप है कि संबंधित कार्य के लिए जिम्मेदार कर्मचारियों की ओर से उसे बार-बार टाल दिया गया। उसने अनुचित पैसों की मांग से संबंधित आरोप भी लगाए हैं, जिनकी स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है। इन आरोपों पर संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों का पक्ष सामने आना आवश्यक है। बेटी की पढ़ाई पर असर, पिता की बढ़ी चिंता एक पिता के लिए बेटी की शिक्षा और भविष्य से बढ़कर कुछ नहीं होता। संजय का कहना है कि जन्म प्रमाण पत्र न मिलने के कारण उसकी बेटी सोनम के स्कूल में दाखिले की प्रक्रिया प्रभावित हो रही है। वह स्वयं हृदय रोग से पीड़ित है और लगातार सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाने से मानसिक परेशानी भी झेल रहा है। सवाल यह है कि यदि आवेदन निर्धारित प्रक्रिया के तहत भेजा गया था, तो उसकी वर्तमान स्थिति स्पष्ट क्यों नहीं की जा रही? यदि पत्रावली कार्यालय में प्राप्त हुई थी, तो उसके निस्तारण की जिम्मेदारी किसकी थी? और यदि पत्रावली उपलब्ध नहीं है, तो उसे खोजने तथा प्रकरण का समाधान करने के लिए अब तक क्या कदम उठाए गए? मुख्यमंत्री और जिलाधिकारी से लगाई गुहार संजय के अनुसार, उसने अपनी शिकायत मुख्यमंत्री, उत्तर प्रदेश सरकार और जिलाधिकारी, लखीमपुर खीरी को रजिस्टर्ड डाक तथा जनसुनवाई आईजीआरएस पोर्टल के माध्यम से भेजी है। अब उसे उम्मीद है कि जिला प्रशासन मामले का संज्ञान लेकर उसकी बेटी का जन्म प्रमाण पत्र बनवाने की प्रक्रिया पूरी कराएगा और लापरवाही के लिए जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय करेगा। प्रशासन से कार्रवाई की मांग इस मामले में जिला प्रशासन और संबंधित विभाग से मांग है कि पत्रावली संख्या 67 की वर्तमान स्थिति की जांच कराई जाए, पत्रावली कार्यालय में प्राप्त होने और उसके बाद हुई कार्रवाई का रिकॉर्ड देखा जाए तथा शिकायत में लगाए गए आरोपों की निष्पक्ष जांच की जाए। यदि किसी कर्मचारी की लापरवाही या अनियमितता प्रमाणित होती है, तो नियमानुसार कार्रवाई की जाए। साथ ही, नियमानुसार आवश्यक सत्यापन पूरा कर संजय की बेटी सोनम के जन्म प्रमाण पत्र के प्रकरण का शीघ्र निस्तारण कराया जाए, ताकि उसकी पढ़ाई प्रभावित न हो। अब देखना यह है कि जिला प्रशासन संजय की शिकायत पर क्या कार्रवाई करता है और एक बेटी के भविष्य से जुड़े इस मामले का समाधान कितनी जल्दी हो पाता है।
