देवेश्वर धीमान
बिजनौर (परिपाटी न्यूज़) उत्तर प्रदेश परिवहन विभाग द्वारा 20 और 21 फरवरी 2026 को उप-सम्भागीय परिवहन कार्यालय परिसर, Bijnor में दो दिवसीय ‘परिवहन मेला’ आयोजित किया जा रहा है, जो जनपद के हजारों वाहन स्वामियों के लिए टैक्स प्रणाली को समझने, बकाया निपटाने और भविष्य के आर्थिक दायित्वों को सुव्यवस्थित करने का महत्वपूर्ण अवसर माना जा रहा है; परिवहन आयुक्त, उत्तर प्रदेश के निर्देश पर आयोजित इस मेले में एकमुश्त कर (OTT–One Time Tax) व्यवस्था पर विशेष फोकस रहेगा, जिसके तहत वाहन के मूल्य के आधार पर एक बार कर जमा कर भविष्य में बार-बार कर भुगतान की प्रक्रिया से मुक्ति पाई जा सकती है, हालांकि एकमुश्त बड़ी राशि जमा करने को लेकर छोटे वाहन स्वामियों में आर्थिक दबाव की आशंका भी व्यक्त की जा रही है; मेले में दो पहिया वाहन, ई-रिक्शा, तिपहिया मोटर कैब, मोटर कैब व मैक्सी कैब, 7500 किलोग्राम तक के हल्के भार वाहन तथा निर्माण एवं विशेष प्रयोजन वाहनों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा; इस आयोजन की खासियत यह है कि यहां केवल जागरूकता नहीं बल्कि ऑन-द-स्पॉट समाधान

उपलब्ध होगा, जिसमें OTT टैक्स की विस्तृत गणना व नियमों की जानकारी, कर भुगतान प्रक्रिया का मार्गदर्शन, बकाया कर व समायोजन का मौके पर निस्तारण तथा परिवहन अधिकारियों से सीधा संवाद शामिल है, जिससे बिचौलियों की भूमिका कम होने और पारदर्शिता बढ़ने की उम्मीद है; विशेषज्ञ इस पहल को एक ओर कर प्रणाली में पारदर्शिता, कानूनी जटिलताओं में कमी और अवैध संचालन पर नियंत्रण की दिशा में सकारात्मक कदम मान रहे हैं, तो दूसरी ओर आशंका जता रहे हैं कि एकमुश्त कर की राशि ई-रिक्शा व छोटे कमर्शियल वाहन संचालकों पर नकदी प्रबंधन का दबाव बढ़ा सकती है; बिजनौर में हजारों की संख्या में संचालित ई-रिक्शा, मैक्सी कैब और हल्के कमर्शियल वाहनों को देखते हुए यह मेला स्थानीय परिवहन व्यवस्था और छोटे व्यापारियों की अर्थव्यवस्था को सीधे प्रभावित करेगा; मेला 20 व 21 फरवरी को सुबह 11:00 बजे से शाम 4:00 बजे तक आयोजित होगा तथा सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी ने सभी वाहन स्वामियों और ट्रांसपोर्ट संगठनों से अधिकाधिक संख्या में पहुंचकर टैक्स संबंधी समस्याओं का समाधान कराने की अपील की है, क्योंकि जो वाहन स्वामी समय रहते OTT को समझकर अनुपालन करेंगे वे भविष्य के जुर्माने व कानूनी कार्रवाई से बच सकेंगे, जबकि उपेक्षा करने पर आर्थिक और प्रशासनिक कठिनाइयां बढ़ सकती हैं।