एक लेख डाक्टर मुनेश चन्द शर्मा की कलम से
ये सत्य पर आधारित एक कहानी है। इसे अवश्य पढ़ें और विचार कर दूसरों को भी शेयर करें।
एक समय था। जब यह संसार नहीं था। केवल और केवल निराकार रूप में यह ईश्वरीय शक्ति विद्यमान थी। ईश्वर ने अपने आपको विस्तृत किया। पहचान बताने के लिए इस श्रृष्टि का श्रृजन किया। ईश्वर कि एक पहचान बनीं। देवी ,देवता, और दैत्य ,ने समस्त विश्व को लेकर विभिन्न क्षेत्रों में अपनी शक्तियों को प्रदर्शित किया। अपनी पहचान बनाई। इस तरह संसार में उन्होंने एक दूसरे को पहचान में बड़ा अर्थात् सर्व श्रेष्ठ बताने का कार्य किया। सबने अपनी-अपनी पहचान बनाई समय चलाये मान होने के कारण हिरणाकुश को भी स्वर्ग धाम में जाना पड़ा। त्रेतायुग में भगवान श्री राम जी का आगमन हुआ। उन्होंने भी अपनी पहचान बनाई। ये सब लोग जानते हैं। कि किस प्रकार राजा का पुत्र होने पर भी अपने माता-पिता कि पहचान के लिए उन्होंने बन गमन किया। राक्षसों का श्रंगहार करते हुए पहचान बनाई गई। समय प्रबल होता है। बस चलता रहा तथा एक दिन उन्होंने भी इस ईश्वर में अपने को विलीन कर दिया गया। आज भी उनका यशो गान किया जाता है। राम नाम सुखदाई भजन करो भाई यह जीवन दो दिन का है। एक दिन फिर द्वापर युग आया क्योंकि समय तो चलाएं मान है। द्वापर युग में श्री कृष्ण जी का आगमन हुआ। और उन्होंने तो जन्म से ही पहचान बतानी शुरू कर दी थी। तब तक बताते ही रहे। जब तक उनका प्रा॑णान्त हुआ। और सभी दुष्टो का श्रृंगहार करते हुए इस प्रभु में विलीन हो गए। इसी प्रकार हम सभी दुनिया वालों का कर्तव्य है ।कि हम भी सत्य कर्म कर नित्य कर्म कर अच्छे कर्म कर अपने भारत देश को आगे बढ़ने का ।अपने बच्चों को कर्तव्य निष्ट बनाने का अपने देश को महान बनाने का मन में विचार करके अपने भारत की पहचान बनाते हुए। अपने आप को अपने भारत राष्ट्र पर न्योछावर करते हुए। इस आत्मा को परमात्मा में विलीन कर दें। तब आपकी भी कहीं ना कहीं इतिहास में पहचान बन सकती है। इसी का नाम पहचान है। जैसे आज मोदी जी ने भी संसार में साहस करके अपने भारत राष्ट्र की एक पहचान बनाई है। अपने आप की पहचान बनाने का ही मनुष्य का संसार में श्रृजन हुआ है।

लेखक- मुनेश चंद शर्मा