अमित सैनी
देहरादून/हरिद्वार। जनपद हरिद्वार के थाना सिडकुल क्षेत्र में 14 वर्षीय नाबालिग किशोरी से दुष्कर्म, उसके 22 सप्ताह (लगभग पांच माह) की गर्भवती होने तथा रुड़की स्थित एक निजी नर्सिंग होम में कथित रूप से अवैध गर्भपात कराने के प्रयास के मामले में उत्तराखंड राज्य महिला आयोग ने कड़ा संज्ञान लिया है। आयोग की अध्यक्ष कुसुम कण्डवाल ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी हरिद्वार, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, एसपी देहात तथा मुख्य चिकित्सा अधिकारी को त्वरित विधिक एवं प्रशासनिक कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश जारी किए हैं।जानकारी के अनुसार, पीड़ित पक्ष द्वारा थाना सिडकुल (रोशनाबाद) में दी गई तहरीर में बताया गया है कि 14 वर्षीय किशोरी के पेट में अचानक तेज दर्द होने पर परिजन उसे बहादराबाद स्थित सेंटर ले गए, जहां अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट में उसके 22 सप्ताह की गर्भवती होने की पुष्टि हुई। पीड़िता ने परिजनों को बताया कि रावली महदूद निवासी समद पुत्र अशरद अली, जो पूर्व से विवाहित और एक बच्चे का पिता है, ने परिजनों की अनुपस्थिति में उसके साथ जबरन दुष्कर्म किया तथा किसी को बताने पर जान से मारने की धमकी दी।राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष कुसुम कण्डवाल ने नाबालिग के साथ दुष्कर्म के मामले में एसपी देहात हरिद्वार से दूरभाष पर वार्ता कर निर्देश दिए कि आरोपी के विरुद्ध पॉक्सो अधिनियम एवं भारतीय न्याय संहिता की सुसंगत धाराओं के तहत नियमानुसार कठोरतम वैधानिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।मामले का दूसरा गंभीर पहलू रुड़की

(रामपुर चुंगी) स्थित एक निजी नर्सिंग होम में कथित रूप से अवैध गर्भपात कराने के प्रयास से जुड़ा है। इस संबंध में आयोग की अध्यक्ष ने जिलाधिकारी हरिद्वार, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक तथा मुख्य चिकित्सा अधिकारी को पत्र भेजकर उक्त निजी नर्सिंग होम की भूमिका की जांच के लिए तत्काल जनपद स्तरीय संयुक्त जांच समिति गठित करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि पूरे मामले की निष्पक्ष एवं गहन जांच कराई जाए तथा यदि जांच में निजी क्लिनिक अथवा किसी चिकित्साकर्मी की ओर से कोई अवैध या गैर-कानूनी गतिविधि सामने आती है तो उनके विरुद्ध तत्काल नियमानुसार सख्त वैधानिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। साथ ही की गई कार्रवाई की आख्या आयोग को भी प्रेषित की जाए।मामले पर गहरा आक्रोश व्यक्त करते हुए आयोग की अध्यक्ष कुसुम कण्डवाल ने कहा कि देवभूमि उत्तराखंड में बेटियों के सम्मान, सुरक्षा और उनके जीवन से खिलवाड़ करने वाले अपराधियों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने कहा कि 14 वर्षीय अबोध बालिका को डरा-धमकाकर उसका शारीरिक एवं मानसिक शोषण करना तथा उसके बाद कानून को ताक पर रखकर अवैध गर्भपात का प्रयास करना अत्यंत जघन्य अपराध है। ऐसे अमानवीय कृत्य करने वाले दुष्कर्म के अपराधियों और इस अवैध कृत्य में संलिप्त पाए जाने वाले प्रत्येक दोषी को कानून के अनुसार कड़ी से कड़ी सजा दिलाई जाएगी। उन्होंने कहा कि राज्य महिला आयोग पीड़ित बेटी के स्वास्थ्य, सुरक्षा और उसे न्याय दिलाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।न्यूज़पेपर की कटिंग बनाकर भेजो अखबार वाली
