देवेश्वर धीमान
बिजनौर (परिपाटी न्यूज़) जिलाधिकारी जसजीत कौर की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट स्थित महात्मा विदुर सभागार में कीटनाशक एवं उर्वरक विक्रेताओं के लिए एक महत्वपूर्ण प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया। यह कार्यशाला बुधवार अपराह्न 01:00 बजे प्रारंभ हुई, जिसका उद्देश्य विक्रेताओं को प्रशिक्षित करना, फार्मर रजिस्ट्री को बढ़ावा देना तथा “धरती माता बचाओ अभियान” के अंतर्गत रासायनिक उर्वरकों के संतुलित उपयोग को प्रोत्साहित करना रहा। कार्यशाला में उपनिदेशक कृषि घनश्याम सिंह, जिला कृषि अधिकारी सहित कृषि विभाग के अन्य संबंधित अधिकारी तथा जनपद के कीटनाशक एवं उर्वरक विक्रेता उपस्थित रहे। जिलाधिकारी ने सभी विक्रेताओं को स्पष्ट निर्देश दिए कि वे फार्मर रजिस्ट्री अभियान में सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि जब भी कोई किसान उर्वरक या कीटनाशक खरीदने दुकान पर आए, तो उससे

उसकी फार्मर रजिस्ट्री संख्या अवश्य पूछी जाए। यदि किसान पहले से पंजीकृत है, तो उसकी रजिस्ट्री संख्या बिल में अनिवार्य रूप से अंकित की जाए। वहीं, जिन किसानों ने अभी तक फार्मर रजिस्ट्री नहीं कराई है, उन्हें इसके लाभों की जानकारी देते हुए शीघ्र पंजीकरण के लिए प्रेरित किया जाए, ताकि वे सरकार द्वारा किसानों के हित में संचालित योजनाओं और कार्यक्रमों का लाभ प्राप्त कर सकें। इसके साथ ही जिलाधिकारी ने जिला कृषि अधिकारी को निर्देशित किया कि एक ऐसा प्रभावी तंत्र विकसित किया जाए, जिससे प्रतिदिन यह आकलन किया जा सके कि उर्वरक एवं कीटनाशक विक्रेताओं द्वारा फार्मर रजिस्ट्री के लिए कितना कार्य किया गया है और उसकी प्रगति क्या है। उन्होंने सभी विक्रेताओं को यह भी निर्देश दिए कि वे अपनी दुकानों पर केवल अच्छी और प्रमाणित ब्रांड की उर्वरक एवं कीटनाशक दवाएं ही रखें। किसी भी स्थिति में नकली खाद या कीटनाशक दवाओं का विक्रय न किया जाए। उन्होंने सख्त चेतावनी देते हुए कहा कि यदि नकली खाद या कीटनाशक बेचे जाने की कोई शिकायत प्रमाणित होती है, तो संबंधित विक्रेता का लाइसेंस निरस्त कर विधिक कार्रवाई की जाएगी। प्रशिक्षण सत्र के दौरान कृषि निदेशक घनश्याम सिंह ने कहा कि कृषि के क्षेत्र में तकनीक का प्रयोग आज के समय में अत्यंत आवश्यक हो गया है। तकनीक के बेहतर उपयोग से न केवल उत्पादन में वृद्धि होती है, बल्कि किसानों की आय भी बढ़ती है। इसके लिए जरूरी है कि सभी लोग नई तकनीकों का प्रशिक्षण लें और उन्हें व्यवहारिक रूप से अपनाएं। उन्होंने “धरती माता बचाओ अभियान” का उल्लेख करते हुए कहा कि इस अभियान को सफल बनाने के लिए उर्वरक एवं कीटनाशकों का संतुलित और आवश्यकता के अनुसार ही प्रयोग किया जाना चाहिए, ताकि मिट्टी की उर्वरता और पर्यावरण दोनों सुरक्षित रह सकें। इस अवसर पर उन्होंने एनपीएस ऐप की जानकारी देते हुए बताया कि किसान अपने मोबाइल में इस ऐप को डाउनलोड करें। यदि फसल में किसी प्रकार के कीट लगने की समस्या दिखाई देती है, तो किसान उस पौधे का फोटो खींचकर ऐप पर अपलोड कर सकते हैं। ऐप के माध्यम से तुरंत यह जानकारी मिल जाती है कि फसल में कौन सा कीट है और उसके नियंत्रण के लिए कौन सी दवा तथा कितनी मात्रा में प्रयोग करनी है। कार्यशाला के दौरान जिला कृषि अधिकारी और विषय विशेषज्ञों द्वारा कीटनाशक एवं उर्वरक विक्रेताओं को नई तकनीकों से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियां दी गईं। साथ ही विक्रेताओं की शंकाओं का समाधान भी किया गया, जिससे वे किसानों को सही मार्गदर्शन दे सकें और कृषि क्षेत्र में गुणवत्ता, पारदर्शिता व पर्यावरण संरक्षण सुनिश्चित किया जा सके।