आकाश कुमार
बिजनौर (परिपाटी न्यूज़) स्योहारा— जनसूचना अधिकार अधिनियम 2005, जिसे सरकार ने आम नागरिकों को पारदर्शिता और जवाबदेही दिलाने के लिए लागू किया था, उसी कानून की खुलेआम धज्जियां स्योहारा क्षेत्र में विद्युत विभाग द्वारा उड़ाई जा रही हैं। आरटीआई के तहत मांगी गई महत्वपूर्ण जानकारी को न सिर्फ गलत पते पर भेजा गया, बल्कि जो सूचना दी गई वह भी अधूरी, भ्रामक और तथ्यों से कोसों दूर बताई जा रही है। सूत्रों के मुताबिक, आरटीआई आवेदक अय्यूब पुत्र मुस्ताक अहमद ग्राम किबाड़ द्वारा स्पष्ट बिंदुओं पर जानकारी मांगी गई थी, लेकिन विद्युत विभाग ने नियमों को ताक पर रखते हुए न तो समय पर सही जवाब दिया और न ही आवेदक के सही पते पर सूचना भेजने की जहमत उठाई। यह सीधे तौर पर यह संकेत देता है कि विभाग जानबूझकर सूचना छिपाने और मामले को दबाने का प्रयास कर रहा है। आरटीआई अधिनियम के तहत यह स्पष्ट

प्रावधान है कि यदि कोई लोक सूचना अधिकारी गलत, अधूरी या भ्रामक सूचना देता तो उसके खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई हो सकती है। बावजूद इसके, विद्युत विभाग के जिम्मेदार अधिकारी कानून से बेखौफ नजर आ रहे हैं। स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि विद्युत विभाग में भ्रष्टाचार, लापरवाही और मनमानी चरम पर है, और जब कोई नागरिक कानून के दायरे में रहकर सवाल पूछता है तो उसे गुमराह करने की कोशिश की जाती है। गलत पते पर सूचना भेजना कोई साधारण भूल नहीं बल्कि आरटीआई को निष्प्रभावी बनाने की सोची-समझी रणनीति प्रतीत होती है। जानकारों का कहना है कि यदि इस मामले में उच्च अधिकारियों ने संज्ञान नहीं लिया तो इसकी शिकायत राज्य सूचना आयोग तक की जाएगी, जहां संबंधित लोक सूचना अधिकारी पर जुर्माना और विभागीय कार्रवाई तय मानी जा रही है।
अब बड़ा सवाल यह है कि क्या जिम्मेदार अधिकारियों पर कोई ठोस कार्रवाई होगी या फिर यह मामला भी फाइलों में दबा दिया जाएगा? फिलहाल जनता की नजरें प्रशासन पर टिकी हैं, और यह मामला पारदर्शिता बनाम मनमानी की एक और कड़ी के रूप में सामने आ चुका है।