नसीम अंसारी
हरिद्वार (परिपाटी न्यूज़) हरिद्वार के ललताराव पुल के पास देर रात अचानक भीषण आग लग गई। आग इतनी तेज़ी से फैली कि आसपास की 4 से 5 दुकानें देखते ही देखते जलकर खाक हो गईं। सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड की टीम मौके पर पहुंची और कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया। इस आगजनी में दुकानों में रख्खा लाखों रुपये का सामान स्वाहा हो गया। गनीमत रही कि इस हादसे में कोई जनहानि नहीं हुई, लेकिन दुकानें जलने से कई दुकानदारों के सामने रोजी-रोटी का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। फिलहाल आग लगने के कारणों की जांच की जा रही है। इस पूरे मामले पर हरिद्वार के जिलाधिकारी मयूर दीक्षित ने बताया कि आग लगने के कारणों की जांच के लिए फायर सेफ्टी ऑफिसर और विद्युत विभाग से रिपोर्ट तलब की गई है। यदि जांच में विद्युत विभाग की किसी भी प्रकार की लापरवाही सामने आती है। तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ

सख्त कार्रवाई की जाएगी जिलाधिकारी ने यह भी बताया कि पिछले महीने इलाके में 300 से 400 अवैध बिजली कनेक्शन काटे गए थे, इसके बावजूद अगर लापरवाही पाई जाती है। तो जिम्मेदारों को बख्शा नहीं जाएगा। फायर सेफ्टी ऑफिसर बालवीर सिंह ने जानकारी देते हुए बताया कि ललताराव पुल पर लगी आग शॉर्ट सर्किट की वजह से हुई है। जिस स्थान पर आग लगी, उसके पास ही बिजली का ट्रांसफॉर्मर मौजूद है। प्रारंभिक आकलन में इस आगजनी से करीब 13 लाख रुपये के नुकसान की रिपोर्ट तैयार कर आपदा प्रबंधन को भेज दी गई है। उन्होंने बताया कि मौके पर फायर विभाग की दो गाड़ियां पहुंचीं, जिनकी मदद से समय रहते आग पर काबू पा लिया गया। गनीमत रही कि इस हादसे में कोई जनहानि नहीं हुई। पीड़ित दुकानदार राजेश कुमार ने बताया कि रात करीब एक बजे उनकी दुकान में अचानक आग लग गई, जिसके आसपास की दुकानों को भी अपनी चपेट में ले लिया। उन्होंने कहा कि दुकान कर्ज लेकर खोली थी और इस आग में करीब साढ़े तीन लाख रुपये का सामान जलकर खाक हो गया। दुकानदार ने प्रशासन से मदद की गुहार लगाते हुए कहा कि अब उनके सामने कर्ज चुकाने और परिवार के पालन-पोषण का बड़ा संकट खड़ा हो गया है। वरिष्ठ पत्रकार देवम मेहता ने बताया कि यह इलाका हरिद्वार के सबसे व्यस्त क्षेत्रों में से एक है। जिन दुकानों में आग लगी, वे अवैध खोखा मार्केट के रूप में संचालित हो रही थीं। घटनास्थल के बिल्कुल पास ही विद्युत विभाग का कार्यालय मौजूद है। जहां से निगरानी की जा सकती थी। सवाल यह उठता है। कि इतनी नजदीकी के बावजूद लापरवाही कैसे हुई। आगजनी में 4 से 5 दुकानें जलकर खाक हो गईं और यह भी बताया कि कुछ बेते दिनों पहले माँ मन्सादेवी भगदड़ प्रकरण पर मे बिजली विभाग की लापरवाही की वजह से उस हादसे में यात्रियों की जान चली गई उसी को देखते हुए हरिद्वार में बड़ा हादसा होने से टल गया। जिसमें दुकानों का ही। नुकसान देखने को मिला है। अब देखना यह है। कि जांच के बाद विद्युत विभाग और संबंधित अधिकारियों पर क्या कार्रवाई होती है।