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संवाददाता – नितिन कुमार/परिपाटी न्यूज मीडिया

बिजनौर (पीपीएन) नेहरू स्पोर्ट्स स्टेडियम में एथलेटिक्स, हॉकी, वॉलीबाल, कबड्डी, फुटबाल, खो-खो, क्रिकेट, बैडमिंटन, शूटिंग, तैराकी, बास्केटबाल सहित 11 खेलों के प्रशिक्षण की यहां पर व्यवस्था है। तथा लेकिन करीब सवा साल से यहां पर केवल एक ही कोच कार्यरत है। वह भी कार्यालय संबंधी कार्य में व्यस्त रहते हैं। इन खेलों से जुड़े लगभग 250 खिलाड़ी स्टेडियम में प्रतिदिन सुबह-शाम अभ्यास करते हैं। जिला मुख्यालय पर स्थित नेहरू स्पोर्ट्स स्टेडियम में खिलाड़ी एकलव्य बनकर अपनी प्रतिभा को निखार रहे हैं। क्योंकि यहां उन्हें खेल में निपुण बनाने के लिए गुरु नहीं है। एथलेटिक्स समेत 11 प्रकार के खेलों के लिए नेहरू स्पोर्ट्स स्टेडियम में सुविधाएं उपलब्ध हैं| इनकी प्रतिभा में निखार लाने के लिए हर साल खेल विभाग की तरफ से अनुभवी कोच की नियुक्ति होती है, लेकिन मार्च 2020 में ही यहां पर कार्यरत सभी कोच का अनुबंध समाप्त हो गया था। इसके चलते स्टेडियम में प्रशिक्षण लेने आने वाले खिलाड़ियों को परेशानी हो रही है। केवल उप जिला क्रीड़ा अधिकारी/एथलेटिक्स कोच के सहारे ही सभी खेलों का काम चलाना पड़ रहा है।


इसके बाद से लेकर खिलाड़ियों को विभिन्न खेलों के दांव पेंच सिखाकर उन्हें पारंगत करने के लिए किसी भी कोच की नियुक्ति नहीं हुई। लेकिन यहां पर वे ही एकमात्र प्रशिक्षक हैं। उनके पास प्रभारी जिला क्रीड़ाधिकारी का भी चार्ज है। नियमानुसार करीब-करीब हर खेल की निगरानी के लिए कोच नियुक्त होना जरूरी है। उन्होंने बताया कि एथलेटिक्स के 99, क्रिकेट के 39, बास्केटबॉल के 19, फुटबॉल के 26, हॉकी के 25, वॉलीबाल के 20, कुश्ती के 22 खिलाड़ी स्टेडियम में अभ्यास के लिए आते हैं। एथलेटिक्स कोच एवं प्रभारी जिला क्रीड़ाधिकारी जयवीर सिंह के अनुसार पिछले वर्ष कोरोना महामारी के कारण लॉकडाउन होने से सारा सिस्टम ही गड़बड़ा गया था। खेल की बारीकि बताने वाला कोई नहींइससे खिलाड़ियों को प्रशिक्षण लेने में परेशानी हो रही है। लॉकडाउन खत्म होने के बाद 25 सितंबर से नेहरू स्पोर्ट्स स्टेडियम में खिलाड़ियों को प्रशिक्षण के लिए छूट मिली थी,
निशानेबाज साम्या मेहर का कहना है कि उनके खेल में कहां कमी है, बिना गुरु के किसी भी क्षेत्र में नहीं हो सकते पारंगत
क्रिकेट खिलाड़ी विक्कर सिंह ने बताया कि क्रिकेट तो क्या किसी भी क्षेत्र में बिना गुरु के ज्ञान अर्जित करना संभव नहीं है। स्टेडियम में कोच नहीं होने के कारण वे और उनके अनेक साथी कई बार मायूस होकर लौटने को ही मजबूर होते हैं। उन्होंने शीघ्र ही इसकी जानकारी नहीं होने से अपने स्तर को बेहतर नहीं बना पा रहे हैं। कोच के अभाव में खिलाड़ी हर दिन केवल अभ्यास करके लौट जाते हैं। खिलाड़ियों को कुछ बेहतर करने और बारीकियों की जानकारी नहीं हो रही है।

By विक्की जोशी

विक्की जोशी मंडल आई.टी. प्रभारी मुरादाबाद