रोनिक गोयल
बिजनौर (परिपाटी न्यूज़) नहटौर। नगर में नौ साल बाद नक्कारे वाली रामलीला के मंचन की तैयारियां अंतिम चरण में पहुंचने के बावजूद आयोजन नहीं हो पाने से नगरवासियों में मायूसी और नाराजगी है। रामलीला को लेकर शुरू हुआ विवाद अब नगर में चर्चा का विषय बना हुआ है। आरोप है कि एक स्थानीय नेता ने अपने पद का दयरूप्योग करते हुए दूसरे पक्ष की रामलीला की अनुमति कराने में भूमिका निभाई, जबकि उसके पास आयोजन की पर्याप्त तैयारियां नहीं थीं। इसके चलते पहले से तैयारियां कर रही आदर्श रामलीला समिति नहटौर (रजि.) को अपना कार्यक्रम रद्द करना पड़ा। घटना के बाद संबंधित नेता की भूमिका को लेकर नगर में सवाल उठ रहे हैं तथा नगर में नेता के प्रति भारी रोष व्याप्त है।समिति की ओर से रामलीला के आयोजन के लिए नगरवासियों से चंदा एकत्र किया गया था। कलाकारों को बुलाने से लेकर टेंट लगाने और अन्य व्यवस्थाओं पर काम शुरू हो चुका था। रामलीला के कलाकार भी नहटौर पहुंच गए थे, लेकिन आयोजन निरस्त होने के बाद उन्हें वापस लौटना पड़ा। टेंट भी उखाड़ दिया गया। तैयारियों पर बयाना आदि के रूप में खर्च की गई रकम में करीब ढाई लाख रुपये का नुकसान होने की बात कही गई है। रविवार को समिति अध्यक्ष आदेश चंद्रा के नेतृत्व में चंदा देने वाले लोगों को 70 प्रतिशत राशि वापस कर दी गई। शेष राशि आज से लौटाने की प्रक्रिया शुरू करने की बात कही गई। समिति के 22 सदस्यों ने तैयारियों में हुए नुकसान की भरपाई आपस में करने का निर्णय लिया है। बैठक से शुरू हुआ विवाद, अनुमति को लेकर बढ़ी खींचतान समिति के मुख्य पदाधिकारियों का आरोप है कि रामलीला कमेटी की बैठक के लिए एक तारीख निर्धारित की गई थी। इससे पहले ही पूर्व अध्यक्ष रंजीत जोशी ने कुछ अन्य नए लोगों के साथ बैठक कर स्वयं को अध्यक्ष घोषित कर दिया।

इसकी जानकारी मिलने पर समिति और समाज के लोगों में नाराजगी फैल गई। इसके बाद कमेटी के सदस्यों ने हाथी वाला मंदिर में बैठक बुलाई। पदाधिकारियों का कहना है कि रंजीत जोशी को बैठक की सूचना कई बार दी गई, लेकिन वह शामिल नहीं हुए।इसके बाद बैठक की कार्यवाही आगे बढ़ाते हुए आदेश चंद्रा को नया अध्यक्ष चुना गया। आदेश चंद्रा के नेतृत्व में रामलीला की तैयारियां शुरू कर दी गईं। झंडा जुलूस भी निकाला गया और नगर में प्रचार-प्रसार के लिए पोस्टर व बैनर लगाए गए। आयोजन के लिए चंदा भी एकत्र कर लिया गया था। जिस आयोजन की तैयारी नहीं, उसकी अनुमति कराने का आरोप समिति के पदाधिकारियों का आरोप है कि झंडा जुलूस वाले दिन शाम को नगर के एक मोहल्ला निवासी एक नेता ने रंजीत जोशी के पक्ष में रामलीला आयोजन की अनुमति कराने में भूमिका निभाई। उनका कहना है कि उस समय दूसरे पक्ष की ओर से आयोजन की एक भी तैयारियां नहीं थीं, जबकि आदेश चंद्रा के नेतृत्व वाली समिति नक्कारे वाली रामलीला के कलाकारों से लेकर अन्य व्यवस्थाओं तक की तैयारी कर चुकी थी। अनुमति को लेकर पैदा हुई स्थिति के कारण पहले से चल रही तैयारियां रद्द करनी पड़ीं। समिति के सदस्यों और नगर के कुछ लोगों का मानना है कि धार्मिक एवं सांस्कृतिक आयोजन को लेकर पैदा हुई खींचतान से बचा जा सकता था। उनका सवाल है कि जब नगर में वर्षों बाद रामलीला के मंचन की तैयारी की जा रही थी, तब विवाद को सुलझाने के बजाय ऐसी स्थिति क्यों बनने दी गई, जिससे आयोजन ही नहीं हो सका।
