मोहन कुमार शर्मा
हरिद्वार (परिपाटी न्यूज़)। अर्धकुंभ के दौरान धर्मनगरी हरिद्वार के गंगा घाटों पर श्रद्धालुओं की सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था को आधुनिक बनाने की तैयारी की जा रही है। इसके तहत घाटों पर कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित सीसीटीवी कैमरे लगाए जाने की योजना है। इन कैमरों के माध्यम से न केवल वीडियो रिकॉर्डिंग की जाएगी, बल्कि चेहरे की पहचान, लोगों और वाहनों की पहचान तथा प्रतिबंधित क्षेत्रों में प्रवेश जैसी गतिविधियों पर भी नजर रखी जा सकेगी। हरिद्वार-रुड़की विकास प्राधिकरण (एचआरडीए) ने इस योजना के लिए 82.13 लाख रुपये की अनुमानित लागत निर्धारित की है। धर्मनगरी हरिद्वार में प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु गंगा स्नान के लिए पहुंचते हैं। पर्वों, विशेष स्नान और धार्मिक आयोजनों के दौरान घाटों पर श्रद्धालुओं की भीड़ काफी बढ़ जाती है। ऐसी परिस्थितियों में गंगा के किनारे फिसलन, तेज जलधारा, गहरे पानी में चले जाने और भीड़ के दबाव के कारण दुर्घटनाओं की आशंका बनी रहती है। इसके अलावा भीड़भाड़ के दौरान किसी व्यक्ति के लापता होने या परिवार से बिछड़ जाने पर उसे तलाशना भी चुनौतीपूर्ण हो जाता है। इन परिस्थितियों को देखते हुए घाटों पर आधुनिक निगरानी व्यवस्था विकसित करने की योजना बनाई जा रही है। प्रस्तावित सीसीटीवी कैमरों की खासियत यह होगी कि वे केवल घटनाओं की रिकॉर्डिंग तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि एआई तकनीक के माध्यम से विभिन्न गतिविधियों का विश्लेषण भी कर सकेंगे। कैमरों की मदद से भीड़ का घनत्व, कतारों की लंबाई और अधिक भीड़ वाले स्थानों का आकलन किया जा सकेगा। इसके साथ ही निर्धारित सीमा को पार करने, प्रतिबंधित क्षेत्र में प्रवेश करने और लोगों की आवाजाही जैसी गतिविधियों का पता लगाने में भी मदद मिलेगी। इससे निगरानी कर्मचारियों को घाटों के अलग-अलग हिस्सों की स्थिति समझने और किसी स्थान पर भीड़ बढ़ने या संवेदनशील स्थिति उत्पन्न होने पर संबंधित टीम को वहां भेजने में सुविधा होगी।

योजना के तहत दो प्रकार के कैमरे लगाए जाने का प्रावधान किया गया है। इनमें आउटडोर बुलेट कैमरे और पीटीजेड कैमरे शामिल हैं। आउटडोर बुलेट कैमरों में रात के समय निगरानी के लिए इन्फ्रारेड तकनीक की सुविधा होगी। इनके लिए 50 से 80 मीटर तक की इन्फ्रारेड दूरी, मोटर से नियंत्रित होने वाले लेंस और मेमोरी कार्ड लगाने की सुविधा निर्धारित की गई है। ये कैमरे धूल और पानी से सुरक्षा के निर्धारित मानकों के अनुरूप होंगे, जिससे खुले वातावरण में भी निगरानी की जा सकेगी। दूसरी श्रेणी में पीटीजेड कैमरे शामिल हैं, जिन्हें आवश्यकता के अनुसार अलग-अलग दिशाओं में घुमाया जा सकता है। इनमें 33 गुना ऑप्टिकल जूम और 200 मीटर तक की इन्फ्रारेड निगरानी क्षमता का प्रावधान है। इस तकनीक के माध्यम से दूर स्थित स्थानों को नजदीक से देखा जा सकेगा और रात के समय भी निगरानी करने में सहायता मिलेगी। इन कैमरों में भी चेहरे की पहचान, भीड़ का आकलन और निर्धारित क्षेत्रों में होने वाली गतिविधियों का विश्लेषण करने जैसी एआई आधारित सुविधाएं प्रस्तावित हैं। अर्धकुंभ जैसे बड़े धार्मिक आयोजन के दौरान हरिद्वार के गंगा घाटों पर श्रद्धालुओं की आवाजाही बढ़ने की संभावना रहती है। ऐसे में घाटों की लगातार निगरानी करना और संवेदनशील स्थानों पर स्थिति का आकलन करना महत्वपूर्ण होगा। एआई आधारित कैमरों से प्राप्त जानकारी सुरक्षा और निगरानी से जुड़े कर्मचारियों के लिए उपयोगी साबित हो सकती है। भीड़ बढ़ने, किसी प्रतिबंधित क्षेत्र में प्रवेश होने या किसी अन्य संदिग्ध गतिविधि का पता चलने पर संबंधित कर्मचारियों को समय रहते कार्रवाई करने में मदद मिल सकती है। हालांकि, वास्तविक लाभ कैमरों की स्थापना, तकनीकी व्यवस्था और निगरानी तंत्र के प्रभावी संचालन पर निर्भर करेगा। कुल मिलाकर, एचआरडीए की प्रस्तावित योजना का उद्देश्य अर्धकुंभ के दौरान गंगा घाटों की निगरानी को आधुनिक तकनीक से जोड़ना और श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए बेहतर व्यवस्था विकसित करना है। योजना लागू होने पर घाटों पर भीड़ प्रबंधन, गतिविधियों की निगरानी और आपात परिस्थितियों में संबंधित टीमों तक सूचना पहुंचाने में सहायता मिलने की उम्मीद है।
