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अजमल अंसारी


नई दिल्ली (परिपाटी न्यूज़) विश्व हिंदी दिवस पर राष्ट्रीय संगोष्ठी में भारतवर्ष के शिरोमणि कवियों ने आराधिका साहित्यिक मंच के माध्यम से अपनी-अपनी रचनाएं प्रस्तुत की। भारतवर्ष के प्रत्येक प्रांत व केन्द्र शासित प्रान्तो से विभिन्न विधाओं के जाने-माने हस्ताक्षरो ने अपनी दस्तक दी। दिल्ली केन्द्र शासित दिल्ली प्रान्त से लेखक-कवि डा रोहताश जमदग्नि ने अपनी कविता “हिंदी हिन्दुस्थान की वाणी” ओजस्वी वाणी में प्रस्तुत करके आनंदविभोर कर दिया, जिसका सार-गर्भ था- सर्वे भवन्तु सुखिन! वसुधैव कुटम्बकम!! डा रोहताश जमदग्नि को हाईब्रिड मोड़ से “सम्मान -पत्र मिला तथा आराधिका साहित्यिक मंच (पंजी) के मुख्य-पृष्ठ पर सम्मानजनक गरिमामयी स्थान भी मिला।
डा रोहताश ने हमेशा ही विधार्थी, शोधार्थी जीवन संग आजकल व्याख्याता के रुप में भारतीय संस्कृति और समाज राजनीति के संदर्भ में पढ़ना – लिखना नहीं छोड़ा है। उनके 50 वर्षीय जीवन में यह अर्ध-शतकीय जीवन यात्रा बचपन से पचपन तक की कहानी लगभग खुली किताब है जैसे – हरियाणा राज्य स्तरीय प्रतियोगिता समारोह में भाषण, चुटकुले, नाटक इत्यादि में डा जमदग्नि प्रथम पुरस्कार से सम्मानित रहें, युवा क्षेत्रीय प्रतियोगिता समारोह में नृत्य, हास्य-नाटिका प्रथम पुरस्कार से सम्मानित रहें, अन्त: युवा क्षेत्रीय प्रतियोगिता समारोह में हास्य-नाटिका में द्वितीय तथा हरियाणा राज्य स्तरीय समारोह प्रतियोगिता में प्रश्नोत्तरी में तृतीय पुरस्कारो से सम्मानित रहें इतना ही नहीं, जिला स्तरीय प्रतियोगिता समारोह “भारतीय स्वतंत्रता की स्वर्ण जयंती” स्नातक प्रथम वर्ष के छात्र डा जमदग्नि ने भाषण प्रतियोगिता में प्रथम पुरस्कार जीतकर अपने महाविद्यालय, राजकीय महाविद्यालय जींद (हरियाणा) का नाम रोशन किया।

डा जमदग्नि शोधार्थी जीवन में 125 शोध पत्र लिख चुके हैं। 180 राष्ट्रीय – अंतरराष्ट्रीय सेमिनारो में सहभागिता कर चुके हैं। एक सफल व्याख्याता के रुप में डा जमदग्नि के 207 समसमायिकी लेख, 215 कविताएं, 17 आलेख, 25 जीवन वृत्तांत विभिन्न राष्ट्रीय पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुके हैं इतना ही नहीं, 13 ग्रन्थों में अपने अध्याय भी डा रोहताश जमदग्नि लिख चुके हैं।
डा रोहताश जमदग्नि कवि-लेखक के रूप में गध-पध लेखन में विभिन्न स्वरचित अप्रकाशित रचनाओं के प्रतिपादक है जैसे गध-1. उपन्यास “सूखा-प्यार” 2. समसामयिक “डरोगे तो छुपोगे! भागोगे तो छोडोगे!! बेचोगे तो मिटोगे!!! लडोगे तो बेचोगे!!!! रहोगे तो बसोगे!!!!! भाग-।, पध-1. हमसे बना मेरा काव्य 2. हरिकाव्यम-1 3. हरिकाव्यम-2 4. भुनफूशाला 5. भारतीय व्यक्तित्वशाला 6. वैश्विक व्यक्तित्वशाला 7. स्मरणशाला आदि-इत्यादि के संदर्भ व परिपेक्ष्य के अंतर्गत सम्मानजनक गरिमामयी उपस्थिति से आराधिका साहित्यिक मंच ने डा जमदग्नि को समझकर पहचानकर तथा आंककर अपनी प्रतिष्ठा में वृद्धि की।

By विक्की जोशी

विक्की जोशी मंडल आई.टी. प्रभारी मुरादाबाद

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