जहां बुद्धि की सीमा समाप्त हो जाती हैं, वहां से ही भक्ति का उदय होता है : रविंद्र संघर्षी
राजवीर सिंह तोमर/ परिपाटी न्यूज़ मीडिया पंडित रविंद्र भारद्वाज संघर्षी जी की वाणी द्वारा लिखित जहां बुद्धि की सीमा समाप्त हो जाती हैं, वहां से ही भक्ति का उदय होता…
