सनातन धर्म में है मानवता का धर्म
राजपाल सिंह
सत्य सनातन धर्म के प्रति हिंदुओं की मैकाले ने जो शिक्षा प्रणाली शुरू की उसके प्रभाव से शिक्षित समाज के प्रतिष्ठित लोग अपने सनातन धर्म की महिमा से अनभिज्ञ होने के कारण इसआस्था नष्ट करने के लिए ब्रिटिश शासन द्वारा परतंत्र भारत मेंका गौरव भूलकर पाश्चात्य काल्पनिक कल्चर से प्रभावित हो रहे हैं। क्योंकि आजभी स्कूल कॉलेज में वही झूठा इतिहास पढ़ाया जा रहा है। भारत को स्वतंत्रता मिलने के बाद भी राजनीतिक पार्टियों ने अपना अपना वोट बैंक बढ़ाने के उद्देश्य से सब धर्म समान है,ऐसा प्रचार शुरू किया। उन्होंने शायद यदि सब धर्मों का अध्ययन किया होता तो वे ऐसी बात कह ही नहीं सकते थे। सब धातुओं के गहने एक ऐसे नहीं होते, सोने की कीमत अलग होती है। सब राजनीतिक पार्टियों एक समान है, ऐसा कोई कहे तो राजनेता नाराज हो जाएंगे। सब अपनी पार्टी को श्रेष्ठ मानते हैं। धर्म के विषय में सर्वधर्म समान बताने मे लाज आती । सनातन धर्म के अतिरिक्त अन्य धर्म अपने धर्म को ही ही सच्चा मानते हैं और दूसरे धर्म की निंदा करते हैं। केवल सनातन धर्म ने ही अन्य धर्मो के प्रति उदारता और सहिष्णुता का भाव सिखाया है। इसका मतलब यह नहीं की सब धर्म समान है। संपूर्ण विश्व में यदि किसी धर्मको ऐसी व्यापक प्रशंस्ति प्रात हुई है तो वह है, सत्य सनातन धर्म। जितनी व्यापक प्रशंस्ति सनातन धर्म को मिली है उतनी ही व्यापक आलोचना अंतर्राष्ट्रीय विद्वानों और दार्शनिकों ने ईसायत की है । सनातन धर्म की महिमा एवं सच्चाई को भारत के संत और महापुरुष सदियों से सैद्धांतिक व प्रायोगिक प्रमाण के द्वारा प्रकट करते आए हैं। यदि सनातन धर्म के महान ग्रंथों का अध्ययन करें तो उनकोभी इसकी श्रेष्ठता के अनेक सैद्धांतिक प्रमाण मिलेंगे।

विश्व प्रसिद्ध विद्वानों के वचन इस प्रकार है– मैंने यूरोप और एशिया के सभी धर्मो का अध्ययन किया है परंतु मुझे उन सब में सनातन धर्म ही सर्वश्रेष्ठ दिखाई देता है।–रोमा रोला(फ्रेंच विद्वान)
मैंने 40 वर्ष तक विश्व के सभी बड़े धर्मो सजन करके पाया की सनातन धर्म के समान पूर्ण , महान और वैज्ञानिक धर्म कोई और नहीं है।–डॉक्टर एनी बेसेंट यदि हम पक्षपात रहित होकर भली भांति परीक्षा करें तो हमें स्वीकार करना होगा कि सारे संसार मे साहित्य और सभ्यता का प्रसार सनातन धर्म में है।—विक्टर कोसिन जीवन को ऊंचा उठाने वाला सनातन धर्म के समान दूसरा कोई अध्ययन संपूर्ण विश्व में नहीं है। इससे मेरे जीवन को शांति मिली है। इससे मुझे मृत्यु के समय भी शांति मिलेगी।–शांपनहार
उपनिषदों की दार्शनिक धाराएं न केवल भारत में संभवत संपूर्णविश्व में अतुलनीय है।—पांल डायसन
यूरोप के प्रथम दार्शनिक प्लेटो और पाइथागोरस दोनों ने दर्शनशास्त्र का ज्ञान भारतीय गुरुओं से प्राप्त किया।–मोनियर विलियम्स पाश्चात्य दर्शनशास्त्र के आदि गुरु आर्य महर्षी हैं, इसमें संदेह नहीं।—प्रसिद्ध इतिहासज्ञ लेथ ब्रीज विश्व के महान धर्मो सनातन धर्म के समान सर्वग्राही एवं वैविध्य पूर्ण और कोई धर्म नहीं है।—उजल्यु क्रुक इस प्रकार हम समझ सकते हैं कि सत्य सनातन धर्म विश्व मे सबसे बड़ा धर्म है।