नसीम अंसारी
हरिद्वार। (परिपाटी न्यूज़) ज्वालापुर क्षेत्र की सराय उमर कॉलोनी में बिजली विभाग की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में है। करीब ढाई साल से बिजली के खंभे पर लटकी तार को लेकर खबर प्रकाशित होने के बाद अब विभाग की हलचल देखने को मिली है। बताया जा रहा है। कि लंबे समय से खंभे पर लटकी तार को ढाई साल बाद हटाया गया है। लेकिन सवाल यह है। कि आखिर इतने लंबे समय तक विभाग के जिम्मेदार अधिकारी किसका इंतजार कर रहे थे? क्या विभाग को किसी बड़े हादसे का इंतजार था या फिर खबर प्रकाशित होने के बाद ही अधिकारियों की नींद खुली? ढाई साल तक खंभा बना रहा शोपीस अब अचानक कार्रवाई क्यों? सराय उमर कॉलोनी में बिजली विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने का मामला कोई एक दिन पुराना नहीं है। स्थानीय स्तर पर सामने आई जानकारी के अनुसार कॉलोनी में बिजली का खंभा तो खड़ा कर दिया गया था लेकिन करीब ढाई साल तक उस पर तार नहीं खींची गई। खंभा लंबे समय तक बिना उपयोग के खड़ा रहा और विभाग की कार्यशैली पर सवाल उठते रहे। अब खबर प्रकाशित होने के बाद तार हटाए जाने की बात सामने आई है। ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है। कि आखिर विभाग को कार्रवाई करने में ढाई साल क्यों लग गए? खबर छपी तो हरकत में आया विभाग? अब इसे खबर का असर कहें या फिर विभाग की अचानक जागी जिम्मेदारी लेकिन ढाई साल से लटका मामला अब चर्चा का विषय बन गया है। खबर सामने आने के बाद यदि विभाग ने कार्रवाई की है। तो यह भी जानना जरूरी है। कि पहले इस समस्या पर ध्यान क्यों नहीं दिया गया। क्या संबंधित अधिकारियों को खंभे की स्थिति की जानकारी नहीं थी? अगर जानकारी थी तो इतने लंबे समय तक कोई ठोस कदम क्यों नहीं उठाया गया? एक खंभे से दूसरे खंभे तक तार क्यों नहीं खींची गई? इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है।

कि जब कॉलोनी में बिजली का खंभा खड़ा किया गया था तो एक खंभे से दूसरे खंभे तक तार खींचने का काम समय पर क्यों पूरा नहीं किया गया? क्या काम अधूरा छोड़ दिया गया था? क्या विभागीय स्तर पर कोई तकनीकी समस्या थी? या फिर जिम्मेदार कर्मचारियों ने इस ओर ध्यान देना जरूरी ही नहीं समझा? इन सवालों का जवाब बिजली विभाग के संबंधित अधिकारियों को देना चाहिए। ढाई साल तक किसकी जिम्मेदारी थी? बिजली विभाग आम जनता को बेहतर और सुरक्षित विद्युत व्यवस्था उपलब्ध कराने का दावा करता है। लेकिन सराय उमर कॉलोनी का यह मामला उन दावों पर सवाल खड़े करता है। यदि कोई काम ढाई साल तक अधूरा रहता है। तो इसकी जिम्मेदारी आखिर किसकी बनती है? संबंधित कर्मचारियों की अधिकारियों की या फिर उस व्यवस्था की जिसमें एक खंभे पर तार खींचने जैसा काम भी वर्षों तक लंबित रह सकता है? अब सवालों से कब तक बचता रहेगा बिजली विभाग? सराय उमर कॉलोनी का मामला अब केवल एक खंभे और तार तक सीमित नहीं रह गया है। यह विभाग की कार्यशैली जवाबदेही और समय पर काम पूरा करने की व्यवस्था पर भी सवाल खड़ा करता है। खबर प्रकाशित होने के बाद यदि विभाग ने कदम उठाया है। तो क्या अब अधिकारी यह भी स्पष्ट करेंगे कि तार खींचने का काम पहले क्यों नहीं हुआ? क्या इस मामले की जांच होगी और लापरवाही सामने आने पर जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय की जाएगी? अब देखने वाली बात यह होगी कि बिजली विभाग इस मामले में केवल तार हटाकर अपनी जिम्मेदारी पूरी मान लेता है। या फिर ढाई साल तक काम अधूरा रहने के कारणों की भी जांच करता है। सराय उमर कॉलोनी के इस मामले ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है। कि क्या विभागीय कामकाज खबर प्रकाशित होने के बाद ही गति पकड़ता है? संबंधित अधिकारियों का पक्ष और कार्रवाई के कारण सामने आने के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
