नसीम अंसारी
हरिद्वार। (परिपाटी न्यूज़) हरिद्वार के श्यामपुर ग्राम पंचायत में ग्राम सभा की भूमि को लेकर विवाद गहराता नजर आ रहा है। पुरानी हरिद्वारी सड़क से श्यामपुर श्मशान घाट की ओर जाने वाले मार्ग के किनारे स्थित ग्राम सभा की जमीन पर कथित कब्जे और बिक्री के आरोपों ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों का कहना है। कि ग्राम प्रधान व भूमाफियाओ द्वारा सरकारी भूमि पर कब्जा किया गया है। लेकिन संबंधित विभाग की ओर से अब तक प्रभावी कार्रवाई होती दिखाई नहीं दे रही है। ग्रामीणों के इन आरोपों ने ग्राम पंचायत से लेकर संबंधित विभागों तक की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। आखिर ग्राम सभा की जमीन की सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी है? यदि सरकारी भूमि पर अवैध कब्जे की शिकायतें सामने आ रही हैं। तो जिम्मेदार अधिकारी मामले का संज्ञान क्यों नहीं ले रहे हैं? ये ऐसे सवाल हैं। जिनका जवाब ग्रामीण संबंधित विभाग से मांग रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है। कि ग्राम सभा की भूमि के कुछ हिस्सों को कथित तौर पर बेचे जाने की चर्चा है। जबकि कुछ हिस्सों पर कब्जा किया गया है। यदि ये आरोप सही पाए जाते हैं। तो यह केवल जमीन का विवाद नहीं बल्कि सरकारी संपत्ति की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मामला होगा। मामले में ग्रामीणों ने ग्राम प्रधान और कुछ कथित भू-माफियाओं की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है। कि ग्राम सभा की भूमि को लेकर गतिविधियां चल रही हैं। लेकिन कार्रवाई के नाम पर स्थिति स्पष्ट नहीं है। सरकारी जमीन पर कथित कब्जा विभाग की निगरानी कहां? सबसे बड़ा सवाल यह है। कि ग्राम सभा की भूमि की निगरानी करने वाले जिम्मेदार अधिकारियों को इस मामले की जानकारी है। या नहीं। यदि शिकायतें अधिकारियों तक पहुंच चुकी हैं। तो अब तक जमीन की पैमाइश अभिलेखों की जांच और मौके की स्थिति स्पष्ट करने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं? ग्रामीण इन सवालों का जवाब चाहते हैं।

सरकारी जमीन किसी व्यक्ति की निजी संपत्ति नहीं होती। यह सार्वजनिक हित और ग्राम पंचायत की व्यवस्था से जुड़ी संपत्ति है। ऐसे में यदि किसी भूमि पर अवैध कब्जे या नियमों के विरुद्ध खरीद-बिक्री की आशंका हो तो प्रशासन को निष्पक्ष जांच कर वास्तविक स्थिति सामने लानी चाहिए। मिलीभगत के आरोपों ने बढ़ाई मामले की गंभीरता ग्रामीणों ने आरोप लगाया है। कि इस पूरे मामले में ग्राम प्रधान और कुछ बड़े अधिकारियों की कथित मिलीभगत हो सकती है। उनका दावा है। कि इसी कारण ग्राम सभा की भूमि को लेकर कोई कार्रवाई नहीं हो रही है। हालांकि मिलीभगत के आरोपों की पुष्टि किसी जांच या आधिकारिक दस्तावेज से अभी सामने नहीं आई है। ऐसे में यह जरूरी हो जाता है। कि प्रशासन केवल आरोप प्रत्यारोप तक सीमित न रहे बल्कि भूमि के राजस्व अभिलेखों की जांच कराए। यह भी स्पष्ट किया जाए कि संबंधित जमीन का वास्तविक क्षेत्रफल कितना है। उसका दर्ज स्वामित्व क्या है। और मौके पर किसका कब्जा है। श्मशान घाट के मार्ग से सटी जमीन पर क्यों उठ रहे सवाल? पुरानी हरिद्वारी सड़क से श्यामपुर श्मशान घाट की ओर जाने वाले मार्ग के किनारे स्थित भूमि को लेकर ग्रामीणों की चिंता बढ़ रही है। सार्वजनिक रास्ते के आसपास की जमीन और ग्राम सभा की संपत्ति से जुड़े मामलों में पारदर्शिता बेहद जरूरी है। यदि भूमि पर किसी तरह का निर्माण कब्जा या हस्तांतरण हुआ है। तो उसकी वैधता की जांच होनी चाहिए। ग्रामीणों का कहना है। कि यदि समय रहते स्थिति स्पष्ट नहीं की गई तो विवाद और गहरा सकता है। इसलिए प्रशासन को मौके का निरीक्षण कराकर वास्तविक स्थिति सार्वजनिक करनी चाहिए ताकि अफवाहों के बजाय तथ्यों के आधार पर कार्रवाई हो सके। अब प्रशासन से जवाब मांग रहे ग्रामीण इस मामले में सबसे अहम सवाल संबंधित विभाग की कार्यशैली को लेकर है। क्या अधिकारियों ने भूमि के अभिलेखों की जांच की है? क्या मौके पर पैमाइश कराई गई है? क्या किसी व्यक्ति के नाम भूमि का वैध हस्तांतरण हुआ है? यदि नहीं तो कथित कब्जे की शिकायतों पर अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई? ग्रामीणों की मांग है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और यदि ग्राम सभा की भूमि पर अवैध कब्जा या गैरकानूनी बिक्री की पुष्टि होती है। तो नियमानुसार कार्रवाई की जाए। साथ ही सरकारी जमीन को सुरक्षित रखने के लिए स्पष्ट कदम उठाए जाएं। जांच हुई तो खुल सकती है पूरे मामले की परतें श्यामपुर की ग्राम सभा की भूमि से जुड़ा यह मामला अब स्थानीय स्तर पर चर्चा का विषय बनता जा रहा है। ग्रामीणों के आरोपों ने प्रशासन के सामने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि अंतिम निष्कर्ष जांच और राजस्व अभिलेखों के आधार पर ही निकाला जा सकता है। अब देखना यह होगा कि संबंधित विभाग इस मामले में कब संज्ञान लेता है। और जमीन की वास्तविक स्थिति सामने लाने के लिए क्या कदम उठाता है। क्या ग्राम सभा की भूमि को कथित कब्जे से सुरक्षित रखने के लिए प्रशासन सक्रिय होगा या ग्रामीणों को जवाब के लिए अभी और इंतजार करना पड़ेगा? फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है। ग्राम सभा की जमीन की सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी है। और ग्रामीणों के आरोपों पर निष्पक्ष जांच कब होगी?
