नसीम अंसारी
हरिद्वार। (परिपाटी न्यूज़) ज्वालापुर क्षेत्र के ग्राम पंचायत सराय स्थित गायत्री विहार के पीछे कथित अवैध कॉलोनी और प्लॉटिंग का मामला सामने आने के बाद सवालों का बाजार गर्म है। स्थानीय स्तर पर एमएलए डेवलपर्स के नाम से कॉलोनी काटे जाने की चर्चा हो रही है। सबसे ज्यादा चर्चा उस बोर्ड को लेकर ह। जिस पर कथित तौर पर काली पन्नी लिपटी हुई दिखाई दे रही है। आखिर बोर्ड पर पन्नी क्यों लपेटी गई है। क्या इसके पीछे कोई वजह है। या फिर यह महज संयोग है। इन सवालों के जवाब मिलने बाकी हैं। बोर्ड पर काली पन्नी आखिर भूमाफिया क्या छिपाना चाहते हैं। कॉलोनी से जुड़े बोर्ड पर काली पन्नी लिपटे होने को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं। यदि कॉलोनी के सभी दस्तावेज और स्वीकृतियां नियमानुसार हैं। तो बोर्ड पर पन्नी लपेटने की जरूरत क्यों पड़ी हालांकि केवल पन्नी लिपटी होने से किसी गड़बड़ी की पुष्टि नहीं होती लेकिन मामले की निष्पक्ष जांच जरूरी मानी जा रही है।

क्या कॉलोनी को (एच.आर.डी.ए) से मिली है। मंजूरी। सबसे बड़ा सवाल यह है। कि क्या एमएलए डेवलपर्स के नाम से बताई जा रही इस कॉलोनी का नक्शा हरिद्वार रुड़की विकास प्राधिकरण (एच.आर.डी.ए) से स्वीकृत है। क्या कॉलोनी विकसित करने के लिए जरूरी अनुमति ली गई है। क्या संबंधित भूमि की धारा 143 के तहत स्थिति स्पष्ट है। इन सभी बिंदुओं पर आधिकारिक जानकारी सामने आना जरूरी है। नियमों को ताक पर रखकर प्लॉटिंग हुई तो कौन होगा जिम्मेदार। यदि जांच में बिना जरूरी अनुमति के कॉलोनी विकसित करने या प्लॉटिंग करने की पुष्टि होती है। तो भूमाफियाओ के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए। वहीं यदि कॉलोनी सभी आवश्यक मानकों को पूरा करती है।तो संबंधित दस्तावेज सार्वजनिक कर स्थिति स्पष्ट की जानी चाहिए ताकि खरीदारों और स्थानीय लोगों के बीच फैले सवालों का जवाब मिल सके (एच.आर.डी.ए) की कार्यप्रणाली पर उठ रहे सवाल गायत्री विहार के पीछे कथित प्लॉटिंग का मामला सामने आने के बाद हरिद्वार विकास प्राधिकरण की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय लोगों की अपेक्षा है। कि प्राधिकरण मौके का निरीक्षण करे और कॉलोनी के नक्शे भूमि की स्थिति स्वीकृतियों तथा निर्माण संबंधी दस्तावेजों की जांच करे। शिकायत करने के बावजूद भी नहीं जाग रहा है। प्राधिकरण क्षेत्र में अनधिकृत कॉलोनियों को लेकर समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं। ऐसे में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि संबंधित स्थल पर नियमों का पालन हो रहा है। या नहीं। यदि कोई अनियमितता सामने आती है। तो प्राधिकरण को नियमानुसार कार्रवाई करनी चाहिए। साथ ही कार्रवाई की स्थिति भी सार्वजनिक की जानी चाहिए। प्लॉट खरीदने वालों के लिए भी जरूरी है। सावधानी कॉलोनी में प्लॉट खरीदने की योजना बना रहे लोगों को भी सावधानी बरतनी चाहिए। किसी भी प्लॉट के लिए रकम देने से पहले संबंधित भूमि के स्वामित्व दस्तावेज स्वीकृत लेआउट नक्शे और जरूरी अनुमतियों की स्वतंत्र रूप से जांच कराना जरूरी है। केवल बोर्ड या प्रचार के आधार पर जमीन खरीदने का फैसला करना जोखिम भरा हो सकता है। अब जवाबदेही की बारी किसकी? गायत्री विहार के पीछे एमएलए डेवलपर्स के नाम से बताई जा रही कॉलोनी को लेकर उठे सवालों का जवाब अब संबंधित पक्ष और (एच.आर.डी.ए) ही दे सकता हैं। बोर्ड पर काली पन्नी क्यों लिपटी है? क्या कॉलोनी का नक्शा पास है? क्या भूमि संबंधी जरूरी अनुमतियां उपलब्ध हैं? क्या प्राधिकरण ने मौके का निरीक्षण किया है?इन सवालों पर आधिकारिक स्थिति स्पष्ट होना जरूरी है। फिलहाल कॉलोनी को अवैध घोषित करने के लिए जांच और दस्तावेजों की पुष्टि आवश्यक है। अब देखना होगा कि (एच.आर.डी.ए) मामले का संज्ञान लेकर जांच करता है। या नहीं और यदि नियमों का उल्लंघन मिलता है। तो क्या कार्रवाई की जाती है। (सूत्रों से मिली जानकारी)
