,विशाल कुमार
मुरादाबाद (परिपाटी न्यूज़)कांठ नगर क्षेत्र में चल रहे सफाई अभियान की जमीनी हकीकत पर अब सवाल खड़े होने लगे हैं। नगर के प्रमुख शिक्षण संस्थानों—दयानंद इंटर कॉलेज, पब्लिक उच्च प्राथमिक विद्यालय, राम सिंह शॉर्ट एंड औरडॉ अशोक राजपूत,स्थानीय लाइब्रेरी के आसपास भारी गंदगी और कूड़े के ढेर से छात्र-छात्राओं व राहगीरों को गंभीर परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
इन विद्यालयों में पढ़ने वाले सैकड़ों बच्चे रोजाना इसी रास्ते से होकर गुजरते हैं। लेकिन सड़क किनारे जमा कूड़ा-कचरा और सड़ांध भरी बदबू के कारण उनका निकलना दूभर हो गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि नगर पालिका की कूड़ा गाड़ी नियमित रूप से क्षेत्र में आती तो है, लेकिन संबंधित स्थान पर सफाई नहीं की जाती, जिससे स्थिति जस की तस बनी हुई है।
मच्छरों और बीमारियों का बढ़ता खतरा

कूड़े के ढेर में विभिन्न प्रकार के कीड़े-मकोड़े और मच्छर पनप रहे हैं। आसपास नालियों की समुचित सफाई नहीं होने और कुछ स्थानों पर नाली बंद कर देने के कारण बरसात और घरों का गंदा पानी नाली पर जमा हो जाता है। जलभराव की यह स्थिति मच्छरों के प्रजनन के लिए अनुकूल माहौल बना रही है, जिससे डेंगू, मलेरिया और अन्य संक्रामक बीमारियों का खतरा बढ़ रहा है और नाली के पानी में से बदबू आ रही है स्थानीयअभिभावकों का कहना है कि छोटे बच्चों की सेहत को लेकर वे बेहद चिंतित हैं। गंदगी के कारण बच्चों को सांस लेने में दिक्कत और संक्रमण का डर बना रहता है। स्थानीय निवासियों ने बताया कि नगर पंचायत के अधिशासी अधिकारी (EO) और वार्ड मेंबर मनोज चौहान से कई बार शिकायत के बावजूद स्थायी समाधान नहीं निकला और बता देते हैं
नगर पालिका अध्यक्ष इकबाल आलम का इस मार्ग से आना-जाना लगा रहता है, लेकिन समस्या पर अब तक ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी है। लोगों कहना है कि एक तरफ तो विकास कार्य चरमगती पर है दूसरी और कुछ जिम्मेदार अधिकारी और कुछ कर्मचारी के राहपरवाही के कारण छवि पर दाग लगाने का कार्य कर रहे हैं
क्षेत्रवासियों की मांग स्थानीय नागरिकों और अभिभावकों ने प्रशासन से मांग की है कि विद्यालयों के आसपास नियमित और विशेष सफाई अभियान चलाया जाए। जाम पड़ी नालियों को तुरंत खुलवाया जाए। कूड़ा डालने वालों पर सख्त कार्रवाई हो। मच्छररोधी दवाओं का छिड़काव कराया जाए। यदि समय रहते समस्या का समाधान नहीं हुआ, तो क्षेत्र में बड़े स्तर पर बीमारी फैलने की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता। अब देखना यह है कि नगर प्रशासन इस गंभीर मुद्दे पर कब तक संज्ञान लेता है और बच्चों के स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं।