कटे पेड़ों की भरपाई के लिए हाईवे किनारे व्यापक वृक्षारोपण की उठी मांग
आशु तोमर
बिजनौर नजीबाबाद( परिपाटी न्यूज़)सहित प्रदेश में बीते वर्षों में तेजी से हाईवे, फोरलेन और अन्य सड़क परियोजनाओं का विस्तार हुआ है। सरकार इसे विकास की बड़ी उपलब्धि मान रही है और इसमें कोई संदेह नहीं कि बेहतर कनेक्टिविटी से व्यापार, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं को गति मिली है। लेकिन इस विकास की कीमत प्रकृति को चुकानी पड़ी है—हाईवे निर्माण के दौरान हजारों पेड़ काटे गए, जिनकी भरपाई आज भी अधूरी है। स्थानीय पर्यावरण प्रेमियों, जागरूक नागरिकों और बुद्धिजीवियों का कहना है कि यदि बने हुए हाईवे के दोनों ओर वन विभाग द्वारा योजनाबद्ध ढंग से वृक्षारोपण कराया जाए, तो कुछ ही वर्षों में बिजनौर के हाईवे हरे-भरे, छायादार और पर्यावरण-संतुलित बन सकते हैं वन विभाग की वृक्षारोपण नीति पर उठे सवाल

जनपद में यह भी देखने को मिल रहा है कि वृक्षारोपण अभियानों के नाम पर प्रायः यूकेलिप्टस या आम जैसे सीमित प्रजातियों के पौधे लगाए जाते हैं। जबकि पीपल, बरगद और शिम्बल (सेमल) जैसे वृक्ष— अधिक मात्रा में ऑक्सीजन प्रदान करते हैं पर्यावरण संतुलन बनाए रखते हैं
पक्षियों और जीव-जंतुओं का प्राकृतिक आश्रय हैं इन प्रजातियों की लगातार अनदेखी की जा रही है। पीपल-बरगद हाईवे किनारे बन सकते हैं जीवन रक्षक विशेषज्ञों का मानना है कि हाईवे किनारे पीपल और बरगद जैसे वृक्ष लगाए जाने से वायु प्रदूषण में कमी यात्रियों को प्राकृतिक छाया सड़क किनारे तापमान संतुलन धूल व धुएं से राहत जैसे अनेक लाभ मिल सकते हैं। साथ ही यह वृक्ष दीर्घकाल तक जीवित रहते हैं, जिससे बार-बार पौधारोपण की औपचारिकता की जरूरत भी नहीं पड़ेगी। शासन-प्रशासन से ठोस पहल की मांग जागरूक नागरिकों ने मांग की है कि हाईवे निर्माण के साथ वृक्षारोपण को अनिवार्य शर्त बनाया जाए और केवल पौधा लगाकर फोटो खिंचवाने की परंपरा पर रोक लगे। साथ ही लगाए गए पौधों की नियमित देखरेख, सुरक्षा और जीवित रहने की जिम्मेदारी तय की जाए भविष्य की पीढ़ियों के नाम आज का निर्णय
लोगों का कहना है कि यदि आज विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन नहीं बनाया गया, तो आने वाली पीढ़ियों को इसका भारी खामियाजा भुगतना पड़ेगा। सड़कें विकास का प्रतीक हैं, लेकिन पेड़ जीवन का आधार। यह समाचार शासन और प्रशासन के लिए केवल सुझाव नहीं, बल्कि एक चेतावनी और अवसर है—कि विकास के साथ-साथ हरियाली को भी उतनी ही प्राथमिकता दी जाए।