
संवाददाता दीपक तोमर/परिपाटी न्यूज मीडिया
अफजलगढ़, बिजनौर पीपीएन। इससे कुछ परेशानी अवश्य महसूस की। उन्होंने सकारात्मक विचारों के साथ उन्होंने कोरोना की जंग जीती और घर वापस लौटे तथा दोबारा अपनी ड्यूटी को अंजाम देने में जुट गए। किंतु कोरोना को मात देकर वह फिर काम पर लौटे और लोगों की सेवा की। अमित विश्नोई बताते हैं। । उस समय कोरोना जांच कर संक्रमितों को घर से एंबुलेंस द्वारा अस्पताल भेजना भी उनका जिम्मा था। पीएचसी कादराबाद स्थित 48 वर्षीय फार्मासिस्ट अमित विश्नोई बीते वर्ष कोरोना काल में अपनी ड्यूटी करते व लोगों की सेवा करते हुए संक्रमित हो गए थे। इसी दौरान वह भी कोरोना की चपेट में आकर संक्रमित हो गए। शुरू में वह परेशान तो हुए, लेकिन हिम्मत नहीं हारी और हौसले से काम लिया। कोरोना काल शुरू होते ही देश विदेश से लोगों के आने का सिलसिला शुरू हो गया थाचिकित्सक की सलाह से ही दवाई लें। हौसला तथा सकारात्मक विचारों से अवश्य कोरोना की जंग जीती जा सकती है। उन्होंने सभी से मास्क का प्रयोग तथा सोशल डिस्टेंस का पालन करने का आह्वान किया है। नोएडा स्थित एक अस्पताल में इलाज कराया और चिकित्सक की सलाह से दवाई ली। वह बताते हैं कि उन्होंने लगातार भाप ली, पीने में गर्म पानी का सेवन किया।इस दौरान उनकी पत्नी व बच्चे भी संक्रमित हो गए। अब अमित विश्नोई लोगों को संदेश देते हैं कि काली मिर्च अदरक का रस लें और गर्म पानी पिएं। कम से कम तीन चार बार भाप लें, रात को दूध में हल्दी डालकर पिएं।