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“भगवान श्री राम की कथा मनुष्य को जीवन जीना सिखाती है – दीपक कृष्ण शंखधार”

रिपोर्ट/जितेंद्र कुमार (परिपाटी न्यूज़)

नूरपुर, बिजनौर (परिपाटी न्यूज़)क्षेत्र के कस्बा राजा का ताजपुर स्थिति राजविलास पैलेस के प्रांगण में सप्त दिवसीय श्री राम कथा का आयोजन किया गया। जिसमें सर्वप्रथम तीस अप्रैल को सोहन सिंह तोमर की पुत्री मीरा तोमर ने फीता काटकर कलश यात्रा का शुभारंभ किया। कलश यात्रा में महिलाएं कलश यात्रा के माध्यम से श्रद्धालुओं को राम कथा के लिए आमंत्रित करती नजर आईं ।कलश यात्रा में सैकड़ो महिलाएं सर पर कलश धारण किये हुये थीं तथा श्रद्धालु ढोल , नगाड़ों के साथ-साथ डीजे पर चल रहे राम भजनो पर नृत्य करते नजर आ रहे

थे। एक मई को पंडित शिवम शर्मा द्वारा विधिवत पूजन के उपरांत श्री राम कथा का शुभारंभ किया गया। सातों दिन राम कथा के मुख्य यजमानों में डॉ जितेंद्र कुमार तोमर गीता तोमर, संजीव वालिया शोभा वालिया, शुभम वालिया काव्या वालिया, समाजसेवी सत्येन्द्र आर्य उर्फ दीपू, पूनम आर्या, अमित विश्वकर्मा ललिता विश्वकर्मा, हेमंत त्यागी, धर्मेंद्र तोमर, रहे ।दीप प्रज्वलित करने वालो में अनिल चौधरी, पुलकित अग्रवाल, जोगेन्द्र चौहान, निर्दोष गुप्ता सौरभ कर्णवाल, रामरतन, अनिल जुनेजा आदि रहे। आचार्य दीपक कृष्ण शंखधार ने भगवान राम की लीलाओं का बहुत सुन्दर ढंग से वाचन किया उन्होने कहा कि भगवान की कृपा के बिना कुछ भी संभव नहीं है भगवान राम की कथा मनुष्य को जीवन जीना सिखाती है अंतिम दिन अनेक सहयोगियों को सम्मानित किया गया ।कथा में अतिथियो में राष्ट्रीय गौ रक्षक दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष स्वामी श्यामजी माहराज, डा० अमित चौहान, भाजपा नेता इं० कविश राणा , करणी सेना के प्रदेश महामंत्री प्रदीप चौहान, आभा फाउन्डेशन के प्रतिनिधि नवनीत चौधरी आदि रहे ।मुख्य सहयोगियों में उषा रानी, विशाखा शर्मा, विवेक सरोहा ,अनिल चौधरी ,जितिन तोमर, सतवेन्दर सिंह गुजराल, श्रवण कुमार, अरुण अग्रवाल, वीरेंद्र शर्मा बजरंग दल के पदाधिकारी सचिन तोमर, सुमित सैनी व उनकी पूरी टीम का सहयोग रहा। मंच का संचालन शुभम वालिया ने किया कथा के अंतिम दिन डॉ जितेंद्र कुमार तोमर, समाजसेवी सत्येंद्र आर्य,संजीव वालिया आदि ने व्यास जी महाराज का सम्मान किया यह कार्यक्रम सभी के सहयोग से किया गया

अयोध्या में प्राण प्रतिष्ठा के बाद क्षेत्र में पहली राम कथा- शुभम वालिया

शुभम वालिया ने बताया कि यह कार्यक्रम प्रतिवर्ष की भांति है लेकिन 22 जनवरी को अयोध्या में राम लला की प्राण प्रतिष्ठा के बाद राजा के ताजपुर में पहली बार राम कथा का आयोजन किया गया है।

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