उत्तराखंड पीपीएन। देहरादून प्रोफेसर सुरेखा डंगवाल जी उत्तराखंड की संस्कृति व परिवेश की एक सशक्त व प्रतिष्ठित हस्ताक्षर हैं । देवभूमि के सुरम्य वातावरण की स्वच्छ वायु व पवित्र मिट्टी की सुगन्ध से परिपूर्ण प्रोफेसर सुरेखा जी को संपूर्ण दक्षिण एशिया में एक कुशल वक्ता, लेखक, समीक्षक, शिक्षक व विमर्शी के रूप में प्रतिष्ठा मिली हुई है। अंग्रेजी भाषा की प्रोफेसर हैं।
वर्तमान में दून विश्वविद्यालय, देहरादून की कुलपति हैं। कुल 35 वर्षों से अध्यापन कार्य में रत प्रोफेसर सुरेखा जी हेमवती नंदन बहुगुणा केंद्रीय विश्वविद्यालय, श्रीनगर, गढ़वाल की अंग्रेजी विभाग की अध्यक्ष से इस कुलपति पद पर आई हैं। आप अविभाजित उत्तर प्रदेश के दौरान यूपी इलेक्ट्रॉनिक्स कारपोरेशन यानी HILTRON में अध्यक्ष (स्तर राज्यमंत्री) पर 4 वर्ष तक रही हैं। हिमालयन पट्टी की समझ से परिपूर्ण प्रोफेसर सुरेखा डंगवाल जी वस्तुतः तिब्बत की स्वतंत्रता, कैलाश मानसरोवर के मुक्ति आंदोलन व चीन की विस्तारवादी रणनीति के लिए आक्रामक तरह से कार्य करने वाले इस भारत-तिब्बत समन्वय संघ(BTSS) के लिए शिव के प्रसाद स्वरूप मिली हैं। आदर्श नारी शक्ति प्रोफेसर सुरेखा डंगवाल जी का भारत तिब्बत समन्वय संघ स्वागत करता है। समस्त संघ पदाधिकारियों का कहना है कि प्रोफेसर सुरेखा डंगवाल अनुभव व उपलब्धियों के आधार पर संघ की केंद्रीय परामर्शदात्री समिति (सेंट्रल एडवाइजरी कमिटी) में शामिल होने का प्रस्ताव स्वीकारा है। BTSS के CAC की सदस्य हैं। परामर्श से ही बहुत नित नए विचार मिलेंगे और संघ के कार्यों में मार्ग प्रशस्त होता जाएगा। भारत तिब्बत संबंध में संघ के समस्त पदाधिकारी एवं सदस्य गणों ने प्रोफेसर सुरेखा डंगवाल को ढेर सारी बधाई दी है।
