
संवाददाता- देवेश्वर धीमान/परिपाटी न्यूज़ मीडिया
बिजनौर पीपीएन। बिजनौर चांदपुर मार्ग पर ही नहीं परंतु जिले में सड़क किनारे खड़े पेड़ों का कटान जोर शोर से चल रहा है! सड़क किनारे खड़े पेड़ों के इस भारी मात्रा में हो रहें कटान के बारे आम लोगों को ज्यादा जानकारी नहीं है सभी लोग अपने अपने हिसाब अलग- अलग कयास लगा रहे हैं कुछ लोगों का मानना है कि कोरोना महामारी के कारण सरकार की आर्थिक स्थिति में सुधार के लिए ये पेड़ काटे जा रहे हैं, कुछ लोगों का मानना है कि फोरलेन हाइवे बन रहा है इसलिए इन पेड़ों का कटान हो रहा है वही कुछ लोगों का मानना है कि सरकार 2022 के विधानसभा चुनाव के धन जुटा रही है! पब्लिक यदि अपने

हिसाब से सड़क किनारे खड़े पेड़ों के कटान के बारे इस तरह के तमाम कयास लगा रही तो इसमें पब्लिक की गलती नही है इसमें गलती प्रशासन की उन्हें इस मामले को सार्वजनिक करने के लिए अखबारों आदि में विज्ञापन के माध्यम से सूचित करना चाहिए था, और साथ ही यह भी बार सूचित करना चाहिए कि आज कौन सी सड़क के पेड़ काटे जायेंगे ताकि आने जाने वाले लोगों को परेशानी का सामना न करना पड़े! जब परिपाटी न्यूज़ से सम्बन्ध में डीएफओ बिजनौर से बात तो उन्होंने बताया कि जिन के वृक्षों की उम्र लगभग 30-35 अर्थात पूरी हो चुकी है उन्हें काटा जा रहा है और इसके अलावा यूकोलिप्टिस के पेड़ों का काटा जा रहा है परिपाटी न्यूज़ ने जब डीएफओ बिजनौर से पूछा कि इन पेड़ों को काटने का कान्ट्रेक्ट किसके पास है और काटे जाने वाले पेड़ों की संख्या और कान्ट्रेक्ट की पूंजी की जानकारी को परिपाटी न्यूज़ के माध्यम से पब्लिक से साझा करने के लिए कहा तो उन्होंने कहा कि इसके बारे में जानकारी वन निगम के पास से लेनी पड़ेगी! परिपाटी न्यूज़ जब वन निगम के नंबर की बात की तो उन्होंने कहा कि मैं नंबर सेंड कर दूंगा और उसके बाद से बार बार सम्पर्क करने पर डीएफओ बिजनौर द्वारा परिपाटी टीम का फोन अटेंड नहीं किया गया और कुछ समय पश्चात डीएफओ स्टेनो का फोन तो उन्होंने एक नंबर दिया जो कनेक्ट नहीं हो पाया परिपाटी न्यूज़ पुन: स्टेनो डीएफओ बिजनौर से सम्पर्क साधकर कहा कि या तो कोई और नंबर दे दीजिए या फिर डीएफओ साहब से बात करा दीजिये हमें सिर्फ दो बातें जाननी एक तो पेड़ कितने कटने हैं और कान्ट्रेक्ट की धनराशि कितनी है,, इस पर स्टेनो डीएफओ बिजनौर ने कहा कि डीएफओ साहब तो वीसी ( वीडियो कान्फ्रेंस) में है ये सभी जानकारी तो वन निगम के पास ही होगी क्योंकि वन विभाग ने कान्ट्रेक्ट वन निगम को दिया है! अब सोचने वाली बात यह है कि आखिर वन विभाग इस कान्ट्रेक्ट को सार्वजनिक करने में हिचकियाँ क्यों ले रहा है जबकि इस बात को डीएफओ बिजनौर स्वयं हमें बता सकते थे और जानकारी तो स्टेनो डीएफओ बिजनौर को भी होनी चाहिए क्योंकि कान्ट्रेक्ट लिखित होता है यही काम तो स्टेनो का होना चाहिए