हरिओम सिहँ
लखीमपुर खीरी {परिपाटी न्यूज} के ओयल कस्बे में स्थित प्रसिद्ध मेंढक मंदिर न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि अपनी अनोखी तांत्रिक वास्तुकला के कारण देश-भर में अलग पहचान रखता है। यह मंदिर लगभग 200 वर्ष पुराना बताया जाता है और इसका निर्माण 1860–1870 के बीच ओयल रियासत के तत्कालीन राजा द्वारा कराया गया था।
इस मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि भगवान शिव का मंदिर एक विशाल मेंढक की पीठ पर निर्मित है, जिसके कारण इसे “मेंढक मंदिर” या “मंडूक मंदिर” कहा जाता है। मंदिर का वास्तविक नाम नर्मदेश्वर महादेव मंदिर है, जहाँ शिवलिंग की नियमित पूजा-अर्चना की जाती है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह मंदिर मंडूक तंत्र पर आधारित है। तंत्र शास्त्र में मेंढक को जीवन, ऊर्जा, वर्षा और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है, इसी कारण मंदिर की संरचना में इस रूप का चयन किया गया। यही वजह है कि इस मंदिर को एक तांत्रिक मंदिर के रूप में भी जाना जाता है।
स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं का मानना है कि मंदिर का निर्माण क्षेत्र में सुख-समृद्धि और प्राकृतिक संतुलन बनाए रखने के उद्देश्य से किया गया था। महाशिवरात्रि, श्रावण मास और विशेष पर्वों पर यहाँ दूर-दराज़ से श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं।
अपनी अद्भुत बनावट, ऐतिहासिक महत्व और धार्मिक आस्था के कारण ओयल का मेंढक मंदिर आज भी लोगों को आकर्षित करता है और लखीमपुर खीरी जनपद की धार्मिक व सांस्कृतिक विरासत को गौरव प्रदान करता है।