रिपोर्ट- राजवीर सिंह तोमर/ परिपाटी न्यूज़ मीडिया देहरादून
भारत तिब्बत समन्वय संघ की प्रंतीय बैठक में हुआ विमर्श
देहरादून पीपीएन। भारत तिब्बत समन्वय संघ ने अफगानिस्तान में हाल ही में घटे घटनाक्रम को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए इसे भारत के लिए खतरा बताया है।
भारत तिब्बत समन्वय संघ की केन्द्रीय परामर्शी समिति की वरिष्ठ सदस्य एवं दून विश्वविद्यालय की कुलपति प्रोफेसर सुरेखा डंगवाल ने चिंता जताते हुए कहा कि किसी भी बाहरी देशों का इस मसले में वक्तव्य न आना मानवता को शर्मसार कर देने वाला तथा चिंताजनक है ,जिसके भयंकर परिणाम अगले वर्षों में विश्व समुदाय को देखने को मिल सकते हैं।
भारत तिब्बत समन्वय संघ की प्रांतीय बैठक की अध्यक्षता करते हुए उन्होंने यह भी कहा कि आत्मनिर्भर भारत बनाने के लिए हमें मिलजुलकर भारतीयता के लिए कार्य करने की दिशा में आगे बढ़ते हुए, स्वदेशी वस्तुओं को बढ़ावा देने को स्थानीय स्तर पर इसकी ब्रांडिंग की आवश्यता है। चाइना निर्मित वस्तुओं से स्वयं को दूर रखकर जनसामान्य में जनजागरण के लिए बी टी एस एस देशभर में कार्य करेगा। उत्तराखण्ड से जुड़े हुए जनहित के विषयों को भी प्रोफेसर डंगवाल ने गंभीरता से बैठक में प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि सीमान्त राज्य होने के कारण हम सभी को सक्रियता से कार्य करने के लिए अधिक से अधिक लोगों को संगठन से जोड़ना होगा।
पूर्व कुलपति एवं परामर्शी समिति के सदस्य प्रोफेसर प्रयाग दत्त जुयाल ने बताया कि उत्तराखंड के शहीदों व वीर पुरुषों के इतिहास को शिक्षा में शामिल करने के लिए जल्दी ही मुख्यमंत्री से मिलकर संगठन ज्ञापन सौंपेगा। प्रदेश अध्यक्ष नरेंद्र चौहान ने बताया कि राज्यभर में आगामी दिनों में तिब्बती मूल के लोगों को संगठन से जोड़ने के लिए अभियान चलाया जाएगा।
उन्होंने कहा कि कैलाश मानसरोवर को चाइना से मुक्त करवाने में तिब्बती मूल के लोगों का अपेक्षित सहयोग मिल रहा है,इसे एक मूवमेंट की तरह लोगों के बीच ले जाने के लिए भारत तिब्बत समन्वय संघ संकल्पबद्ध है। बैठक में प्रोफेसर विजय कॉल, प्रोफेसर एच सी पुरोहित, डॉ राजेश भट्ट, क्षेत्र संगठन मंत्री मोहन भट्ट, प्रान्त संरक्षक श्याम सुंदर वैश्य, उमेश कन्नौजिया,कर्नल हरिराज सिंह राणा सहित अनेक गणमान्य लोगों ने विचार साझा किए।



