ललित कुमार धीमान/ परिपाटी न्यूज़ मीडिया सहारनपुर
सहारनपुर पीपीएन। उत्तर प्रदेश मान्यता प्राप्त विद्यालय शिक्षक संघ ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर हकीकत नगर के धरना स्थल पर धरना-प्रदर्शन कर महामहिम राज्यपाल को सम्बोधित 12 सूत्रीय ज्ञापन एस.डी.एस.सदर को सौंपा।
धरने को सम्बोधित करते हुए संघ के प्रदेश अध्यक्ष डा.अशोक मलिक ने कहा कि संघ ने अपनी विभिन्न समस्याओं के निराकरण को लेकर मुख्यमंत्री सहित आला अधिकारियों को ज्ञापन दिये लेकिन आज तक उनकी संघ की समस्याओं का निराकरण नहीं किया गया है। पीडित स्कूल संचालकों को मुआवजा राहत पैकेज व आरटीई के अंतर्गत निःशुल्क बच्चों की वांछित शुल्क प्रतिपूर्ति की मांग की गयी लेकिन एक भी समस्या का निदान नहीं किया गया। प्रदेश सरकार निजी स्कूलों की ओर मुंह फेरे हुए हैं इसलिए हमारी समस्याएं बढ़ती जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार एक साजिश के तहत निजी स्कूलों को बंद कर अपने स्कूल चलाना चाहती है, एक तरफ तो सरकार अपनी मौहल्ला क्लास चला रही है, दूसरी ओर हमारे खिलाफ स्कूल बन्द करने फरमान जारी कर रखा है जो कि घोर अन्याय है।
शमलिक ने कहा कि कोरोना काल के कारण सभी शिक्षण संस्थाएं बंद होने के कारण शिक्षा विभाग के द्वारा छात्रों को प्रमोट करने का निर्णय लिया गया था और शिक्षण संस्थाओं से जो अंक मांगे गये थे, उसी के सापेक्ष में शिक्षण संस्थाओं ने छात्र-छात्राओं के अंक शिक्षा विभाग को दिये थे लेकिन शिक्षा विभाग व माध्यमिक शिक्षा परिषद मेरठ ने उसका उल्टा करते हुए पढ़ने वाले छात्रों को कम अंक दिये गये, और न पढने वाले छात्रों को अधिक अंक दिये और अधिक अधिकतर बच्चों का रिजल्ट रोकते हुए बिना किसी आधार के विधैल्ड कर दिया जिसे विभाग की घोर लापरवाही के कारण छात्र-छात्राएं डिप्रेशन में हैं और आत्महत्या करने को विवश हो रहे हैं।
वत्सराज स्वाधीन,संजय शर्मा व के.पी.सिंह ने कहा कि आर.टी.ई. के अंतर्गत 25 प्रतिशत निःशुल्क गरीब बच्चों को वर्ष 2016-17 से 2019-20 तक आधा अधूरा फीस प्रतिपूर्ति दी गयी थी। 2020-21 का फीस प्रतिपूर्ति पूरी बकाया है, इसलिए अविलम्ब फीस प्रतिपूर्ति का भुगतान किया जाये अन्यथा हम मजबूर होकर उक्त निःशुल्क बच्चों को स्कूल से बाहर निकालने के लिए बाध्य होंगे। इस सत्र के प्रवेश नहीं लिए जायेंगे जिसकी सम्पूर्ण जिम्मेदारी शासन प्रशासन की होगी। कोरोना महामारी के कारण स्कूल गत वर्ष से बन्द पड़े है, जब सरकार किसानों को बाढ़ राहत, सूखा पैकेज, फसल बीमा सहित अन्य क्षतिपूर्ति के क्लेम सरकार पूर्ति करती है तो कोविड-19 के कारण बन्द स्कूलों को महामारी राहत पैकेज दिया जाये, अन्यथा मजबूर होकर हमें अपने विद्यालय खोलने को विवश होना पड़ेगा। निजी स्कूलों के शिक्षकों व संचालकों की यदि कोविड-19 से मृत्यु हो गयी है तो सरकार द्वारा उसे कुछ नही दिया जा रहा है जबकि सरकारी शिक्षकों को भारी भरकम मोटी रकम दी जा रही है। सरकारी शिक्षकों की तर्ज पर ही निजी स्कूलों के संचालकों व शिक्षकों को भी नौकरी दी जाए और आर्थिक सहयोग भी प्रदान किया जाये।
अमजद अली एडवोकेट व मुक्तदीर हसन ने कहा कि त्रिभाषा अध्यापक आज भूखमरी के कगार पर है, इस प्रकार त्रिभाषा अनुदान तत्काल बहाल किया जाये, उत्तर प्रदेश में करीब 800 संस्कृत विद्यालय बंद होने की कगार पर हैं, मदरसा आधुनिकीकरण की तर्ज पर निजी संस्थाओं के द्वारा संचालित कराकर अनुदानित व मानदेय दिया जाये, मान्यता अस्थायी तीन वर्ष के लिए दी जाती है, यह खत्म होनी चाहिए। क्योंकि मान्यता के नवीनीकरण में भ्रष्टाचार को बढावा मिलता है, मदसों के शिक्षकों के समान मान्यता प्राप्त हिन्दी माध्यम के शिक्षिकों को मानदेय और अल्पसंख्यक बच्चों के समान बहुसंख्यक बच्चों की छात्रवृत्ति अविलम्ब बहाल की जाये, निजी विद्यालय स्वयंसेवी संस्थाओं द्वारा बिना लाभ हानि के संचालित किये जाते हैं। लॉकडाउन के चलते संस्थाओं में फीस नहीं आ रही है, इसलिए बिजली का बिल, हाउस टैक्स, विद्यालय ऋण, स्कूलों की वैन की किश्त, गाडी के फिटनेस व परमिट आदि माफ किया जाये।
प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि सरकार अब भी नहीं चेती तो संघ वृहद रूप से आंदोलन करेगा जिसकी समस्त जिम्मेदारी शासन प्रशासन की होगी अन्यथा शीघ्र ही सरकार उनकी मांगों का निराकरण कराये।
धरने को डा.जावेद, डा.अयाज, कु.पीकीं, संजय शर्मा, वत्सराज,तौकीर अहमद, राकेश सैनी, गयूर आलम, नौशाद अली, आदि ने भी सम्बोधित किया।
धरने पर मुख्य रूप से नरेन्द्र त्यागी, शमशाद अली, कुलदीप, पी.एम.बरूआ, गगनदीप, देवरानी शर्मा, विनोद, प्रदीप, के.पी.सिंह,अमजद, असगर, मुजाहिद, रेखा चौधरी, विक्रम, भोपाल प्रधान, मनीष, सत्यपाल पुण्डीर, मंजू, प्रतिभा, वर्षा, रूबी, ओमवती, मुक्तदीर, अमरीश शर्मा आदि भारी संख्या में शिक्षक मौजूद रहे।

