
संवाददाता-दीपक भार्गव/परिपाटी न्यूज़ मीडिया
गंज बिजनौर पीपीएन। विदुर कुटी एक ऐसा धाम जिसके नाम से महाभारत काल की यादें ताजा हो जाती है जैसा कि आप सभी जानते हैं कि भारत भूमि के कई आईकोनिक स्थानों मे से अपनी अलग पहचान बनायेंगे रखने वाले विदुर कुटी धाम जो कि महाभारत काल से आज तक तक के समय के बीच की कड़ी है जिसका अपना अलग ही पर्यावरण और शान है जहा एक तरफ तो महात्मा विदुर की तपस्थली है (जहां आकर स्वयं भगवान विष्णु के अवतार भगवान श्री कृष्ण ने दुर्योधन के ५६ भोग त्याग कर विदुर कुटी धाम में बथुआ का साग खाया था) और वही

दूसरी तरफ भगवान विदुर के नाम से प्रसिद्ध विदुर वानप्रस्थ आश्रम जिसमे कई वनव्रस्थि आज भी निवास करते हैं और सिर्फ इतना ही नहीं बल्कि वही आश्रम से बिलकुल सटा हुआ महात्मा विदुर जी के नाम से जुड़ा हुआ श्री विदुर गुरु गृह विद्यालय और शांत वातावरण पक्षियों के मधुर गीत जहां आकर कोई भी मंत्रमुग्ध हो जाए और साथ ही महात्मा विदुर जी के मंदिर को छूकर मचलती मां गंगा जिसके जल से स्नान करते हुए यहां

श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता था किंतु अब से वर्षो पहले गंगा जी महात्मा विदुर से दूर होती चली गई और अब तो विदुर कुटी धाम से गंगा दर्शन करने के लगभग 1.5 से , 2किलो मीटर की दूरी कच्चे रास्ते से तय करनी पड़ती हैं जिसको लेकर कई बार स्थानीय लोगों ने शासन प्रशासन को सूचित करते हुए गंगा जी को घाट तक लाने की मांग की है लेकिन कभी भी किसी शासनिक और प्रशासनिक अधिकारियों के सिर पे जूं नहीं रेंगी सिर्फ आश्वासन ही मिलता रहा है लेकिन वही आज गंगा दशहरा के पावन पर्व पर गंगा नदी का जलस्तर बढ़ने से गंगा जी फिर घाट तक आ पहुंची है और जिसको यहां देखकर स्थानीय लोगों को अब से पहले की यादें ताजा हो रही हैं और लोगो में काफी खुशी का माहोल भी बना हुआ है क्युकी यदि यहां गंगा जी घाट पर ही रहे तो इस धाम में आने वाले श्रद्धालूओ की संख्या में भी वृद्धि होगी और स्थानीय लोगो को नए रोजगार के अवसर मिलेंगे

और वही जब परिपाटी न्यूज टीम ने जब विदुर कुटी धाम के महंत राजकुमार जी से संपर्क किया तो उन्होंने बताया की यहां बहुत समय के बात गंगा दशहरा पर्व पर गंगा स्नान किया जा रहा है जिससे उन्हें इस दृश्य से अपर खुशी महसूस हो रही है और उन्होंने बताया कि हम पहले से ही गंगा जी को घाट तक लाने के लिए प्रयास कर रहे हैं जिसको लेकर उमा भारती जी के विदुर कुटी आगमन पर भी उन्होंने यह प्रस्ताव रखा था और उमा भारती द्वारा भी यह आश्वासन मिला था की जल्दी ही यह गंगा जी को घाट तक लाया जाएगा लेकिन अभी तक किसी ने भी कोई सुधि नहीं ली है और आज गंगा जी स्वयं आ गई है सिर्फ इतना ही नहीं वही गंगा घाट गंज भी स्थिति विदुर कुटी धाम घाट के ही समान है और वही गंज मे भी गंगा घाट पर स्थित शनि

मंदिर के महंत मुनिशानंद महाराज ने भी यही बताया है की तमाम लोगों के साथ उनकी भी यही कामना है कि गंगा जी गंज घाट पर ही रहे ।जी हा ये तो रही अवसर की बात लेकिन यदि आफत की बात की जाए तो आप सभी को बता दूं कि घाट से गंगा की दूरी लगभग 2किलो मीटर है जो की आज शून्य हो चुकी है लेकिन इस दूरी अंतराल में कुछ लोग खेती कर रहे हैं जिससे उनका जीवन यापन हो सके लेकिन आज गंगा जी द्वारा इस दूरी अंतराल को शून्य करने से इनके खेतो मे भी जलभराव हो गया है जिससे फसल नष्ट हो जाने का पूरा खतरा बढ़ गया है और वही आज पास के खादर क्षेत्र के गावों में भी पानी भरने से काफी किल्लत हो जाती है यदि ऐसी स्थिति मे रात को सोते समय अचानक जल स्तर बढ गया तो जनहानि का भी भय बना रहता है