
25 अक्टूबर 1951 को हुआ था, भारत का पहला आप चुनाव बेल्ट पेपर से
मौ.अरबाज
संभल (परिपाटी न्यूज़) सिरसी, देशवासियों जैसा कि आपको मालूम होगा। अंग्रेजो से आजादी के बाद राजशाही को खत्म करते हुऐ, लोकतंत्र की नींव रखते हुऐ, भारत में पहला आम चुनाव आज ही के दिन हुआ था, ये सभी भारतीयों के लिए खुशी की बता थी, तथा सभी देशों की नजर इस आम चुनाव पर टिकी हुई थी पहला आम चुनाव की चुनाव आयुक्त सुकुमार सेन पर बहुत बड़ी जिम्मेदारी थी और उन्होंने स्वतंत्र भारत की जिम्मेदारी निष्पक्ष रूप से निभाई पहले चुनाव में सभी महिलाओं को वोट करने का अवसर वोटिंग लिस्ट में नाम न होने के कारण से नहीं मिल पाया लेकिन अगले चुनाव में इसका सुधार कर लिया गया। भारतीय लोकतांत्रिक व्यवस्था को बनाए रखने का काम जिस तरह से 1950 में किया गया था उसको भारतीय नेताओं अधिकारियों एवम् जनता ने बहुत ही सूझ बूझ के साथ इसको लागू करने में अपना योगदान किया उस समय भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था की नींव धर्मनिरपेक्षता आधारित थी। लेकिन जैसे जैसे समय आगे बढ़ता रहा भारत की चुनाव प्रक्रिया और चुनाव आयुक्त संघ अधिकारी कर्मचारी संग जनाता का मानसिक सोच धर्मनिरपेक्षता को पीछे छोड़ते हुऐ धार्मिक और जातिवादी होती चली गई वर्तमान में इसको संवैधानिक पदों पर बैठे नेताओं की स्पीच से अंदाजजा लगाया जा सकता है।

जिन अधिकारियों को शिक्षा चिकित्सा सुरक्षा, इंसाफ के साथ अन्य जिम्मेदारी दी गई है, वो अपनी जिम्मेदारी लिखित रूप से कम और मौखिक आदेश पर ज्यादा निष्ठा के साथ निभा रहे है,वर्तमान में इसको इस तरह देखा जा सकता है कि एक कमजोर पर अत्याचार होने पर उसकी रिपोर्ट जबतक नहीं लिखी जाती है, जब विपक्ष या सामाजिक संगठन उस मुद्दे को अंतर्राष्ट्रीय मुद्दा न बना दे। वर्तमान में जनता और पार्टी चमक दार अमीर उम्मीदवार को ही आगे बढाने का काम कर रही है, जो कि लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए घातक है।इस ओर यदि बुद्धिमान वर्ग ने ध्यान नहीं दिया तो आने वाला समय फिर से राजशही व्यवस्था में दिखाई देगा और पार्टियों ने इसकी नींव रख कर बिल्डिंग का निर्माण करना शुरू कर दिया है। आज के मुद्दे जो बेरोजगारी भ्रष्टाचार है उसको दरकिनार करते हुए जातिवाद धर्म बाद मानव बाद में लोगों को उलझा कर रख दिया है। जिससे देश बहुत पीछे होता चला जा रहा है। और धार्मिक भावनाओं को भड़काने में वर्तमान राज शाही का बहुत बड़ा योगदान है! यदि समय रहते ईस पर ध्यान नहीं दिया गया। तो आने वाला समय घातक साबित हो सकता है। आज देश में मुद्दों पर आधारित राजनीति ना सत्ता पक्ष कर रहा है ना विपक्ष जो चिंता का विषय है। आज राजनीति भविष्य को सुरक्षित करने के लिए और परिवार वाद के लिए की जा रही है। हमारे देश में शिक्षा का व्यवसायीकरण होने के साथ-साथ राजनीति का भी व्यवसायीकरण हो चुका है। जो चिंता का विषय है। आज देश को अच्छे और सच्चे क्रांतिकारियों की जरूरत है। बुद्धिजीवी वर्ग को इसके लिए आगे आना होगा। और देश की एकता वा अखंडता को बचाना होगा। खुद जागरूक बने और दूसरों को जागरूक करें।