रिपोर्ट – अमित सैनी/रायवाला
हरिद्वार परिपाटी न्यूज। प्रगतिशील भोजनमाता संगठन, उत्तराखंड नैनीताल ने 25 फरवरी को अपनी विभिन्न मांगों को लेकर विकास भवन रोशनाबाद पर एकत्रित होकर सभा की। उसके बाद वहां से जुलूस निकाल कर जिलाधिकारी महोदय के आवास पर जाना था लेकिन शासन प्रशासन ने भोजन माताओं को विकास भवन पर ही रोक दिया। जब भोजनमाताओं ने इसका विरोध किया तब इंटेलिजेंस के अधिकारी ने कहा कि आप कलेक्ट्रेट पर चलो डी एम महोदय वहीं आयेंगे। लेकिन 2 बजे तक वहां न तो डी एम आए तब भोजनमाताओं ने कहा कि हमे झूठ बोल कर यहां बैठा दिया और डी एम खुद गायब हो गए। तब भोजन माताओं ने तय किया कि हम वहीं उनके आवास पर जायेंगे। तब पुलिस प्रशासन ने कलेक्ट्रेट का गेट बंद कर दिया ताकि भोजन माताएं

बाहर न जा सके। भोजन माताओं ने वहां नारे लगाने शुरू कर दिए तब सिटी मजिस्ट्रेट वहां आई और उन्होंने आश्वासन दिया कि कि कल डी एम महोदय से भोजन माताओं का प्रतिनिधि मण्डल मिलवाया जायेगा। तब सिटी मजिस्ट्रेट को संगठन ने एक ज्ञापन माननीय मुख्यमंत्री को दिया और अपनी स्थानीय समस्याओं को लेकर एक ज्ञापन जिलाधिकारी महोदय को दिया।भोजनमाता संगठन की हरिद्वार संयोजिका दीपा ने सभा का संचालन करते हुए कहा कि यूनियन 25 फरवरी को दिल्ली के जंतर-मंतर में प्रदर्शन कर अपनी मांगे केन्द्र

सरकार के समक्ष रखना चाहती थी| लेकिन दिल्ली पुलिस-प्रशासन ने हमारी अनुमती खारिज कर हमें प्रदर्शन करने से रोक दिया गया। जो हमारे लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन करना है। सर्वविदित है कि जंतर-मंतर प्रदर्शन स्थल है। लेकिन वहां प्रदर्शन की हमारी अनुमति खारिज कर दी गई इसलिए आज हम यहां प्रदर्शन कर रहे हैं। यूनियन की रजनी ने कहा कि उत्तराखंड में लगभग 27000 भोजनमाताएं सरकारी, अर्द्ध सरकारी स्कूलों में लगभग 19-20 सालों से भोजन बनाने का काम कर रही हैं। हम केवल भोजनमाता ही नहीं हैं बल्कि वास्तविक तौर पर मां भी है। प्रत्येक मां जानती है कि बच्चों की देख-रेख व खान-पान कैसे किया

जाता है। और इतने सालों से भोजनमाता का कार्य करते करते हम अपने कार्य में कुशल हो गए हैं। लेकिन हमें स्कूलों में धमकी दी जा रही है कि जिसके बच्चें स्कूलों में पढ़ रहे हैं उन्हीं को भोजनमाता रखा जायेगा। यहां तक कि पौड़ी जिले में यह जी.ओ. लागू भी कर दिया गया है। इतने साल तक भोजनमाता (माता) होने के बाद हमारे साथ यह व्यवहार कहां तक ठीक है? संगठन की ललिता ने कहा कि हम भोजनमाताओं से भोजन बनाने के अतिरिक्त पूरे विद्यालय की साफ-सफाई, विद्यालय खोलने बंद करने की जिम्मेदारी, क्यारी बनवाना, जब तक विद्यालय बंद नहीं हो जाता तब तक विद्यालय में बिठाए रखने आदि काम करवाए जाते हैं। जिनका हमें मात्र 3 हजार रूपए मानदेय मिलता है। संगठन की अनिता जोशी ने कहा कि जब हम कहते हैं कि हमारे जी.ओ. में हमारा काम साफ सफाई के साथ भोजन बनाया और बच्चों को खिलाना है और ऊपर बताए गए कामों में से किसी भी काम को करने से मना करते हैं तो हमें स्कूल से निकालने की धमकी दी जाती है। कहीं हमें नौकरी से न निकाल दे इस डर से हम सारे काम करते है। संगठन की दिलशाना ने कहा कि कई विद्यालयों में गैस चूल्हे होने पर भी खाना लकड़ी के चूल्हों पर बनवाया जाता है। कई विद्यालयों में भोजनमाताओं को समय से मानदेय भी नहीं दिया जाता है। यूनियन की कोषाध्यक्ष नीता ने कहा कि मिड-डे-मिल योजना का संचालन केन्द्र सरकार करती है। लेकिन जब से इस योजना को लागू किया गया है तब से केन्द्र ने मिड डे मील वर्करों का कोई पैसा नहीं बढ़ाया है और उत्तराखंड राज्य सरकार ने भी भोजनमाताओं को 5 हजार का मानदेय देने की बात कह कर मात्र 3 हजार रुपए ही दे रही है। जबकि देश के अलग अलग राज्यों जैसे पाण्डुचेरी, केरला, तमिलनाडू, लक्ष्यदीप आदि में मिलने वाली राशी व उत्तराखंड, उत्तरप्रदेश, छत्तीगढ़, बिहार, राज्यस्थान जैसे अन्य राज्यों में मिलने वाली राशी में कई गुना का फर्क हैं। मिड डे मील वर्करों की समस्याओं को हल करना केन्द्र और राज्य दोनों की जिम्मेदारी बनती है लेकिन दोनों ही जिम्मेदारियों से हाथ खींचने का काम कर रही हैं। हमारी मुख्य मांगें: -1. भोजनमाताओं को किसी भी बहाने से नौकरी से न निकाला जाए।2. भोजनमाताओं से विद्यालयों में अतिरिक्त काम न करवाया जाए।3. भोजनमाताओं को धुएं से मुक्त किया जाए।4. भोजनमाताओं को वेतन बोनस समय से दिया जाए।5. भोजनमाताओं को न्यूनतम वेतन दिया जाय।6. सभी भोजनमाताओं की स्थाई नियुक्ति की जाय।7. भोजनमाताओं को चतुर्थ कर्मचारी घोषित करो।8. स्कूलों में 26 वें विद्यार्थी पर दूसरी भोजनमाता रखी जाए तथा पेंशन, प्रसूती अवकाश जैसी सुविधाएं दी जाए। प्रगतिशील भोजन माता संगठन की रजनी,ललिता,बाला, अनिता जोशी,राम रति,दिलशाना, चांदनी,माया पूनम,सुमन,रचना भगवति, देवकी इंदू आदि उपस्थित रहे। भोजनमाताओं की मांगों के समर्थन करते हुए सामाजिक संगठन और हरिद्वार की अन्य ट्रेड यूनियने कार्यक्रम में शामिल हुई। इनमें इंकलाबी मजदूर केन्द्र के पंकज कुमार, दीपक कुमार, प्रगतिशील महिला एकता केन्द्र के नीशा, प्रिति , क्रांतिकारी लोक अधिकार संगठन के नासिर अहमद , भेल मजदूर ट्रेड यूनियन के अध्यक्ष राज किशोर, महामंत्री अवधेश कुमार , फूड्स श्रमिक यूनियन आई टी सी के अध्यक्ष गोविन्द सिंह , देव भूमि श्रमिक संगठन के महामंत्री दिनेश कुमार , एवरेडी मजदूर यूनियन के महामंत्री अनिल कुमार , सीमेंस वर्कर्स यूनियन के महिपाल, विप्रो मजदूर कमेटी के कुलदीप सिंह,शिव कुमार, राजा बिस्किट मजदूर संगठन के प्रधान बृजेश कुमार,बृज मोहन आदि शामिल रहे।
