
देवेन्द्र जोहरी/ परिपाटी न्यूज़ मीडिया
हरिद्वार पीपीएन। वैष्णव बैरागी अखाड़े के बाबा श्री हठयोगी जी महाराज, जो कि पूर्व में अखाड़ा परिषद के राष्ट्रीय प्रवक्ता और वर्तमान में अखाड़ा परिषद के सचिव प्रतिनिधि हैं, बाबा हठयोगी ने कहा कि 17 अप्रैल के निरंजनी अखाड़ा एवं अग्नि अखाड़े के कुंभ समापन करने के लिए उनका अपना निजी फैसला है, बाबा श्री हठयोगी का कहना है कि यह अखाड़े आज से नहीं बल्कि आदि अनादि काल से पहले से ही 14 अप्रैल बैसाखी के बाद एक या 2 दिन बाद चले जाते थे, अर्थात अपने कैंपों को उखाड़ लेते थे,

जबकि बैरागी अखाड़ों की तीनों ऑडियो का पूर्णमासी का स्नान करने के पश्चात अपने कैंपर को उखाड़ने की परंपरा है। यह सब प्रशासन और अखाड़ा परिषद की मनमर्जी का कमाल है, जबकि हम तो पहले भी कह रहे थे कि कुंभ 11 अप्रैल के बाद शुरू करना चाहिए था, परंतु अपनी मनमर्जी के चलते हैं यह कुंभ शुरू कर दिया, कोविड-19 के इस खतरनाक दौर में इन्होंने बहुत लोगों को संक्रमित कर दिया है, अगर यह स्नान 11 के बाद शुरू होते तो शायद इस महामारी का मुंह ना देखना पड़ता, बाबा हठयोगी ने यह भी कहा आगामी स्नान के लिए हमारा वैष्णव अखाड़ा बैठकर जो निर्णय लेगा वहीं तीनों ऑडियो को मान्य होगा,हम इनकी घोषणाओं को स्वीकार नहीं करते हैं ना ही हमारा कोई मतलब है
बाबा हठयोगी सत्य कह रहे हैं ,पूर्णमासी को अंतिम स्नान के बाद कुंभ समाप्ति होनी चाहिए !