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लेखक- पँ॰ रविन्द्र भारद्वाज संघर्षी

मैं रंग नहीं पाया तो,क्या
शब्दो से ही मैं रंग दूंगा।
जब रंग विहीन संसार लगे,
उस समय तुम्हरा संग दूंगा।
सांसारिक रंग स्थाई नहीं,
हर पल में रंग बदलते है।
वादा तो पूरे जीवन का,
दो कदम संग ना चलते है,
ये सपथ करें हम होली पर,
चाहें हम कितने दूर रहें।
फीका ना पड़े ये प्रेम रंग,
कितने ही हम मजबूर रहें।
होली तो दिलों का संगम है,
हर साल समागम होता रहे,
बेचारा ये मन,मन ही तो है,
कभी हंसता है,कभी रोता है,
हे!सपन कल्पना की मूरत,
होली पर अगर तू आ जाये।
नीरस,सूखी,प्यासी होली में,
आनंद घटा सी छा जाये।

By PARIPATI NEWS

PARIPATI NEWS MEDIA GROUP

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