प्रभात कुमार त्रिपाठी
लखीमपुर खीरी {परिपाटी न्यूज } मोहम्मदी ग्रामीणों की सुविधा के लिए सरकारी धनराशि से निर्मित बारात घर के उपयोग को लेकर विकासखंड मोहम्मदी की ग्राम पंचायत बगरेठी में सवाल खड़े हो गए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि गांव में बने सरकारी बारात घर में पिंटू नाम का व्यक्ति अपने परिवार के साथ करीब तीन वर्षों से रह रहा है। यदि यह भवन सार्वजनिक कार्यक्रमों के लिए बनाया गया है, तो इसका उपयोग निजी आवास के रूप में किए जाने की शिकायत गंभीर है। ग्रामीणों ने ग्राम प्रधान रामवीर सिंह की भूमिका पर भी सवाल उठाते हुए मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि बारात घर का निर्माण गांव के लोगों को शादी-विवाह और अन्य सामाजिक कार्यक्रमों के लिए सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से किया गया था। ऐसे में भवन का उपयोग निर्धारित उद्देश्य के अनुरूप हो रहा है या नहीं, इसकी जांच जरूरी है।
सरकारी संपत्ति के उपयोग की जांच जरूरी ग्रामीणों का कहना है कि सरकारी धन से निर्मित सार्वजनिक भवन किसी व्यक्ति विशेष के निजी उपयोग तक सीमित नहीं रहना चाहिए। यदि किसी परिवार को बारात घर में रहने की अनुमति दी गई है, तो यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि अनुमति किस अधिकारी ने, किन नियमों के तहत और कितनी अवधि के लिए दी है। यदि बिना अनुमति कब्जा पाया जाता है, तो नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए। मौके की तस्वीर से उठे सवाल मौके पर ली गई तस्वीर में भवन और उसके आसपास की स्थिति दिखाई दे रही है।

हालांकि, तस्वीर मात्र से अनधिकृत कब्जे की पुष्टि नहीं होती। इसलिए संबंधित विभाग द्वारा स्थलीय निरीक्षण, भवन के अभिलेखों की जांच और जिम्मेदार व्यक्तियों से पूछताछ कराया जाना आवश्यक है ग्राम प्रधान और संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय हो मामले में ग्राम प्रधान रामवीर सिंह तथा संबंधित ग्राम पंचायत और विकासखंड अधिकारियों की भूमिका की जांच की मांग उठ रही है। जांच में यह भी स्पष्ट किया जाना चाहिए कि भवन की देखरेख की जिम्मेदारी किसके पास है और यदि लंबे समय से उसका उपयोग निजी आवास के रूप में हो रहा है, तो अब तक क्या कार्रवाई की गई।बीडीओ से मांगा जाएगा जवाब खंड विकास अधिकारी (बीडीओ), मोहम्मदी से इस संबंध में पक्ष लिया जाएगा। उनसे पूछा जाएगा कि क्या विभाग को सरकारी बारात घर में परिवार के रहने की जानकारी है, क्या इस संबंध में कोई अनुमति दी गई है और शिकायत सही पाए जाने पर भवन को सार्वजनिक उपयोग के लिए उपलब्ध कराने हेतु क्या कदम उठाए जाएंगे। प्रशासन से स्पष्ट मांग: जिलाधिकारी लखीमपुर खीरी और खंड विकास अधिकारी मोहम्मदी मामले का संज्ञान लेकर निष्पक्ष जांच कराएं। जांच रिपोर्ट में भवन के स्वामित्व, उपयोग, अनुमति और देखरेख से जुड़े तथ्यों को स्पष्ट किया जाए। यदि अनधिकृत कब्जा या नियमों का उल्लंघन प्रमाणित होता है, तो नियमानुसार भवन को खाली कराने, सार्वजनिक उपयोग बहाल करने तथा जिम्मेदार व्यक्तियों के विरुद्ध कार्रवाई की जाए। साथ ही की गई कार्रवाई की जानकारी शिकायतकर्ता और ग्रामीणों को उपलब्ध कराई जाए।परिपाटी न्यूज इस मामले में संबंधित अधिकारियों का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रकाशित करेगा।
