रिपोर्ट- हर्षित भारद्वाज/ परिपाटी न्यूज़, मीडिया चांदपुर
गणेश जी को कभी भी विदा नहीं करना चाहिए, क्योंकि अगर विघ्न हरता ही विदा हो गए तो तुम्हारे विघ्न कौन हारेगा। ओम एकदंताय नमो नमः
क्या कभी सोचा है। गणेश प्रतिमा का विसर्जन क्यों? अधिकतर लोग एक दूसरे की देखा देखी गणेश जी की प्रतिमा स्थापित कर रहे हैं । और 3 या 5 या 7 या 11 दिन की पूजा के उपरांत उनका विसर्जन भी करेंगे। आप सब से निवेदन है, कि आप गणपति की स्थापना करें।
पर विसर्जन नही,। विसर्जन केवल महाराष्ट्र में ही होता हैं। क्योंकि गणपति वहाँ एक मेहमान बनकर गये थे। वहाँ लाल बाग के राजा कार्तिकेय ने अपने भाई गणेश जी को अपने यहाँ बुलाया था।और कुछ दिन वहाँ रहने का आग्रह किया था, जितने दिन गणेश जी वहां रहे उतने दिन माता लक्ष्मी और उनकी पत्नी रिद्धि व सिद्धि तथा उनके पुत्र शुभ, लाभ,वही उनके साथ वहीँ रहे। इनके रहने से लालबाग धन-धान्य से परिपूर्ण हो गया । तो कार्तिकेय जी ने उतने ही दिन का श्री गणेश जी को लालबाग का राजा मानकर सम्मान दिया।
यही पूजन गणपति उत्सव के रूप में मनाया जाने लगा।
अब रही बात देश की अन्य स्थानों की तो गणेश जी हमारे घर के मालिक हैं। और घर के मालिक को कभी विदा नही करते। अगर हम गणपति जी का विसर्जन करते हैं, तो उनके साथ लक्ष्मी जी व रिद्धि- सिद्धि, तथा शुभ लाभ भी चले जायेंगे। तो फिर जीवन मे बचेगा ही क्या। हम बड़े शौक से कहते हैं। गणपति बाप्पा मोरया अगले बरस तू जल्दी आ इसका मतलब हमने एक वर्ष के लिए गणेश जी लक्ष्मी जी आदि को जबरदस्ती पानी मे बहा दिया। तो आप खुद सोचो कि आप किस प्रकार से नवरात्रि पूजा करोगे,किस प्रकार दीपावली पूजन करोगे। और करने का क्या अधिकार रखते हो, जबकि आपने उन्हें “एक वर्ष” के लिए भेज दिया।
आप भगवान शिव की संतान हो और आप भी इसलिए गणेश जी की स्थापना तो करें पर विसर्जन कभी न करे।

